सागर जहरीली शराब कांड में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा – आरोपितों की संपत्ति पर किस आधार पर चलाया बुल्डोजर

सागर ब्यूरो

सागर जिले के बहुचर्चित जहरीली शराब मामले में आरोपितों को हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपितों की संपत्ति पर प्रशासन द्वारा की जा रही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की संपत्ति पर फिलहाल किसी प्रकार की आगे की तोड़फोड़ नहीं की जाए.

कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया
यह आदेश सिद्धार्थ सिंह कुशवाह सहित अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि प्रशासन ने संपत्ति ध्वस्तीकरण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना कार्रवाई शुरू कर दी. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि प्रशासन की कार्रवाई के दौरान उनकी संपत्ति की बाउंड्रीवाल सहित निर्माण के कुछ हिस्सों को भी तोड़ा गया.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि किसी आपराधिक प्रकरण में आरोपित बनाए जाने मात्र के आधार पर उनकी संपत्ति के विरुद्ध इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती. उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की.

अगली सुनवाई तक नहीं होगी तोड़फोड़
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए उनकी संपत्ति पर आगे की तोड़फोड़ रोकने का निर्देश दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक संबंधित संपत्तियों पर इस प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाए.

राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता आरके केशरवानी अदालत में उपस्थित हुए. उन्हें शासन से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया गया है. अब अगली सुनवाई में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की परिस्थितियों और अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है.

जहरीली शराब मामले के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
सागर जिले में जहरीली शराब प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. इसी क्रम में संबंधित आरोपितों की संपत्तियों पर प्रशासन की ओर से तोड़फोड़ की कार्रवाई किए जाने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि संपत्ति ध्वस्त करने से पहले कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए था. इसी मुद्दे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने फिलहाल आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी.

अब प्रशासन के जवाब पर नजर
हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब मामले में शासन और प्रशासन की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी. अगली सुनवाई में अदालत के सामने यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई किस आधार पर की गई थी और उसमें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं.

फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश से याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर आगे की बुलडोजर कार्रवाई रुक गई है. मामले में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष रखे जाने वाले दस्तावेज तथा शासन का पक्ष आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होंगे.

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