सागर ब्यूरो
कार्तिक मास में बुद्धि के दाता, विघ्नहर्ता श्रीगणेश और धन-ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए दिवाली का दिन बहुत खास माना गया है। इस दिन भगवान राम असुरों का संहार करके अयोध्या लौटे थे, जिनका दीपोत्सव करके स्वागत किया गया था। दिवाली का दिन लक्ष्मी के स्वागत का दिन है। हम चारों ओर प्रकाश फैलाकर सकारात्मकता के साथ महालक्ष्मी से समृद्धि और सम्पन्नता मांगते हैं। शक्ति आराधना यानि काली पूजा के लिए भी यह कार्तिक अमावस्या सर्वोपरि मानी गई है। आइए जानते हैं दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी जी की पूजा और पूजन के लिए क्या रहेगा मुहूर्त का समय।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। दिवाली पर विशेष रूप से घरों को दीयों और रंगीन लाइटों से सजाया जाता है। दिवाली का रात को दीप प्रज्जवलित करके प्रकाश का पर्व मनाया जाता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख,समृद्धि, धन और वैभव का स्थायी वास होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त 20 अक्तूबर को शाम 07 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस तरह के पूजन के लिए कुल 01 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न को माना जाता है। इससे अलावा भी अलग-अलग प्रयोजनों के लिए कई तरह के मुहूर्त होते हैं जिसमें लक्ष्मी पूजन किया जाता है।











