नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 27 मई को अपने अहम फैसले में कहा कि चुनाव आयोग के पास स्ढ्ढक्र कराने का पूरा अधिकार है. कोर्ट में बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रकिया को चुनौती दी गई थी जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने एसआईआर कराने की आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है. इन याचिकाओं में यह दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत आयोग के पास इतने बड़े स्तर पर एसआईआर कराने की शक्तियां नहीं हैं.
देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग ने बिहार में SIR कराकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का कोई उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि इस तरह के अभ्यास से वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित हुई और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव में सहायता मिली.
कोर्ट ने कहा, हम इस बात से भी पूरी तरह संतुष्ट हैं कि एसआईआर द्वारा प्राप्त किया जाने वाला उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से सीधा जुड़ा हुआ है. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करते. वे मूल रूप से वोटर लिस्ट की सत्यनिष्ठा, सटीकता और विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव हैं.
अपने फैसले में कोर्ट ने आगे कहा, आयोग द्वारा दर्ज किए गए कारण, यानी अंतिम गहन संशोधन के बाद से चार दशकों से अधिक का समय बीत जाना, कई सालों से बड़े पैमाने पर नामों का जुडऩा और हटना, तीव्र शहरीकरण, प्रवासन और इसके परिणामस्वरूप वोटर लिस्ट में पुनरावृत्ति और अशुद्धियों की संभावना, स्पष्ट रूप से उस मूलभूत सत्यनिष्ठा को बनाए रखने की दिशा में निर्देशित हैं.
12 अगस्त को शुरू हुई थी अंतिम बहस
इससे पहले चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली एक बेंच ने 29 जनवरी को लंबी सुनवाई के बाद इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इनमें चर्चित एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीएआर) द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी. बिहार में स्ढ्ढक्र की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 अगस्त को इस मामले पर अंतिम बहस शुरू की थी. तब कोर्ट ने यह कहा था कि कि वोटर लिस्ट में नामों को शामिल करना या उन्हें हटाना, चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत आता है. चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन 65 लाख लोगों के नामों की लिस्ट जारी की थी, जिन्हें बाद में प्रकाशित की गई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से हटा दिया गया था.










