नेपाल में भीषण फ़्लैश फ्लड से भारी तबाही, 95 मौतों के बाद बिहार यूपी में हाई अलर्ट, 100 भारतीय लापता

काठमांडू. नेपाल के तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी. रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई क्षेत्रों में अचानक उमड़े पानी और मलबे ने सड़कें, पुल, बस्तियां और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह कर दीं. नेपाल में मृतकों की संख्या 95 तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी दी गई है, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं. इनमें कम से कम 105 भारतीय नागरिक शामिल बताए गए हैं.

नेपाल में अचानक आई इस आपदा का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों तक पहुंचने की आशंका ने बिहार और उत्तर प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है. नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. बिहार में गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जा रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में गंडक, नारायणी और अन्य सहायक नदियों के जलस्तर की निगरानी की जा रही है.

बिहार सरकार ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारियां तेज कर दी हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में संबंधित जिलों के अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और सभी जरूरी बचाव एवं राहत इंतजाम तैयार रखने के निर्देश दिए हैं. पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित गंडक नदी से जुड़े जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. अधिकारियों को तटबंधों की लगातार जांच, रात में निगरानी और संवेदनशील इलाकों में समय पर सूचना पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.

बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 फाटक एहतियाती तौर पर खोल दिए गए हैं. जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम को भी बैराज की निगरानी के लिए भेजा गया है. विभाग ने गंडक नदी के बेसिन में आने वाले जिलों को चेतावनी जारी करते हुए अधिकारियों को लगातार जलस्तर पर नजर रखने और तटबंधों की स्थिति की समीक्षा करने को कहा है.

प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को कहा गया है. प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं को ही विश्वसनीय मानने की अपील की गई है. यदि जलस्तर में तेजी से वृद्धि होती है तो निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी रखी गई है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी किसी आपात स्थिति के लिए तैयार रखी गई हैं.

उत्तर प्रदेश में भी नेपाल से आने वाले पानी को लेकर सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाई गई है. महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है. हालांकि अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल उत्तर प्रदेश में बड़े खतरे की स्थिति नहीं बनी है और गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहने की संभावना बताई गई है. इसके बावजूद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी है. नेपाल में हुई तबाही के पीछे शुरुआती तौर पर सामान्य बारिश को मुख्य कारण नहीं माना जा रहा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नेपाल के रसुवा क्षेत्र में बुधवार को स्थानीय स्तर पर बहुत अधिक बारिश नहीं हुई थी. प्रारंभिक आकलन में तिब्बत-नेपाल सीमा के पास भूस्खलन या चट्टानी मलबे के कारण नदी का मार्ग बाधित होने और अचानक पानी का दबाव बढ़ने की संभावना सामने आई है. इससे भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बहाव आया और पानी त्रिशूली नदी प्रणाली की ओर बढ़ा. हालांकि आपदा के सटीक कारण और घटनाक्रम की जांच अभी जारी है.

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