नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वाहन की नंबर प्लेट छिपाने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल नंबर प्लेट को ढकना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। न्यायालय ने कहा कि यदि किसी मामले में बेईमानी की नीयत, किसी व्यक्ति को धोखे में रखकर संपत्ति प्राप्त करने या नुकसान पहुंचाने जैसे आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं, तो केवल नंबर प्लेट छिपाने के आधार पर धोखाधड़ी का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने इस आधार पर आरोपी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया, जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई को यथावत रखा।
यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने मोहम्मद अब्दुल अहद शाकर बनाम तेलंगाना राज्य एवं अन्य मामले में सुनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस का यह अनुमान कि वाहन चालक ने ट्रैफिक चालान से बचने या भविष्य में पहचान छिपाने के उद्देश्य से पिछली नंबर प्लेट ढकी होगी, मात्र एक आशंका है। केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आपराधिक मामला कायम नहीं किया जा सकता।


