नई दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में पहली बार वर्ष 1975-77 के आपातकाल पर विस्तृत अध्याय शामिल किया है. नई पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है. साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं, मौलिक अधिकारों, मीडिया की भूमिका, नागरिक सहभागिता और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है. इस बदलाव को स्कूली पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण संशोधन माना जा रहा है.
नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड’ में लोकतंत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों पर केंद्रित अध्याय के अंतर्गत आपातकाल का उल्लेख किया गया है. पुस्तक में बताया गया है कि वर्ष 1975 में देश में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था, जिसके दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लागू हुई और अनेक राजनीतिक नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. पुस्तक के अनुसार इस अवधि में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित हो गई थीं.
एनसीईआरटी के अधिकारियों के अनुसार पहली बार कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अलग से सामग्री जोड़ी गई है. यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब देश ने हाल ही में आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे किए हैं. पुस्तक में उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, जन असंतोष और विरोध प्रदर्शनों को भी पृष्ठभूमि के रूप में प्रस्तुत किया गया है.
पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला गया है. इसमें बताया गया है कि उनके नेतृत्व में चले जन आंदोलनों ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संगठित किया. साथ ही वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने और आम चुनावों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है.


