बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर खंडपीठ ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी के आपराधिक मामले में बरी हो जाने मात्र से उसे बर्खास्तगी अवधि का वेतन और भत्ते स्वत: प्राप्त करने का अधिकार नहीं मिल जाता.
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू होगा. कोर्ट ने दोषसिद्धि के आधार पर की गई बर्खास्तगी को वैध माना और यह भी स्पष्ट किया कि बाद में बरी होने से पूर्व में की गई प्रशासनिक कार्रवाई स्वत: निरस्त नहीं हो जाती.
कर्मचारी की पूर्व अपील खारिज
यह फैसला विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी की अपील पर सुनाया गया, जिसमें कर्मचारी ने बर्खास्तगी अवधि के वेतन-भत्तों की मांग की थी. डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पूर्व फैसले को बरकरार रखते हुए कर्मचारी की अपील खारिज कर दी.
काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू होगा. कोर्ट ने दोषसिद्धि के आधार पर की गई बर्खास्तगी को वैध माना और यह भी स्पष्ट किया कि बाद में बरी होने से पूर्व में की गई प्रशासनिक कार्रवाई स्वत: निरस्त नहीं हो जाती.
कर्मचारी की पूर्व अपील खारिज
यह फैसला विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी की अपील पर सुनाया गया, जिसमें कर्मचारी ने बर्खास्तगी अवधि के वेतन-भत्तों की मांग की थी. डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पूर्व फैसले को बरकरार रखते हुए कर्मचारी की अपील खारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का भी हवाला दिया और कहा कि बर्खास्तगी अवधि के वेतन-भत्तों का दावा कर्मचारी का स्वत: अधिकार नहीं माना जा सकता. प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा.










