संविदा कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अनुबंध में शर्त नहीं तो स्थानांतरण भी नहीं

राजीव रंजन श्रीवास्तव, सागर 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि नियुक्ति अनुबंध में स्थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं है, तो अनुबंध की अवधि के दौरान कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं भेजा जा सकता. न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह व्यवस्था देते हुए संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिए. अदालत ने कहा कि अनुबंध प्रभावी रहते हुए उसकी मूल शर्तों में एकतरफा बदलाव कर स्थानांतरण करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता.

मामला संविदा कर्मचारी मुकेश कुमार उपाध्याय एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित था. याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उनकी नियुक्ति एक निश्चित स्थान और निर्धारित कार्य के लिए हुई थी तथा नियुक्ति अनुबंध में कहीं भी स्थानांतरण की कोई शर्त शामिल नहीं थी. ऐसे में सेवा अवधि के बीच जारी किए गए स्थानांतरण आदेश अनुबंध की मूल भावना और शर्तों के विपरीत हैं.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 24 फरवरी 2020 को जारी परिपत्र का हवाला देते हुए स्थानांतरण आदेशों को उचित ठहराने का प्रयास किया. सरकार का पक्ष था कि प्रशासनिक आवश्यकताओं के आधार पर स्थानांतरण किया जा सकता है. हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई. अदालत ने कहा कि उक्त परिपत्र केवल विशेष परिस्थितियों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सीमित अधिकार प्रदान करता है. इससे नियुक्ति अनुबंध की मूल शर्तों में स्वतः परिवर्तन नहीं माना जा सकता.

अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि संविदा नियुक्ति स्थायी सरकारी सेवा से अलग प्रकृति की होती है. इसमें कर्मचारी और नियुक्तिकर्ता के बीच हुए अनुबंध की शर्तों का विशेष महत्व होता है. यदि अनुबंध में स्पष्ट रूप से स्थानांतरण का प्रावधान नहीं है और कोई असाधारण परिस्थिति भी प्रमाणित नहीं की जाती, तो कर्मचारी को दूसरे स्थान पर भेजना अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होगा. इसलिए ऐसे स्थानांतरण आदेश कानूनी रूप से टिक नहीं सकते.

हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण छूट भी दी है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद यदि सरकार नए या नवीनीकृत अनुबंध में स्थानांतरण संबंधी शर्त शामिल करना चाहे तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होगी. ऐसे संशोधित अनुबंध के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकते हैं.

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला प्रदेश में कार्यरत बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह सिद्धांत और मजबूत हुआ है कि संविदा नियुक्ति पूरी तरह अनुबंध की शर्तों से संचालित होती है और नियुक्तिकर्ता अनुबंध लागू रहने के दौरान उसकी मूल शर्तों में एकतरफा बदलाव नहीं कर सकता. माना जा रहा है कि यह निर्णय भविष्य में संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़े अन्य मामलों में भी महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में उद्धृत किया जाएगा.

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