नई दिल्ली/भोपाल। देश की राजनीति में भूमि सौदों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के परिवार को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। एक ओर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े कथित हितों के टकराव और संदिग्ध सौदों के आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके पुत्र प्रियंक खड़गे पर कर्नाटक में एक ट्रस्ट के माध्यम से भूमि हासिल करने और प्रभाव का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट से हुई, जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 से अब तक लगभग 168 एकड़ भूमि खरीदी है। रिपोर्ट के अनुसार इन भूमि सौदों का कुल मूल्य लगभग 45 करोड़ रुपये बताया गया है। कांग्रेस ने इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार की भूमि संपत्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पार्टी का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भूमि खरीदी गई, वहां सड़क, राजमार्ग और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के कारण भूमि की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई। इसके अलावा कुछ भूखंडों का उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी में किए जाने का भी दावा किया गया है, जिससे उनकी बाजार कीमत और निवेश क्षमता बढ़ गई।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि उज्जैन में भूमि से जुड़े कई सौदों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी सवाल उठाया कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले की जांच क्यों नहीं कर रही हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि खरीदी गई भूमि का बड़ा हिस्सा उस क्षेत्र में स्थित है जहां वर्ष 2028 में सिंहस्थ कुंभ का आयोजन प्रस्तावित है।
हालांकि भाजपा ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक प्रेरित बताया है। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम पर केवल वही भूमि है जिसका उल्लेख उन्होंने अपने नामांकन पत्र में किया था और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर एक पिछड़ा वर्ग के मुख्यमंत्री को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस बिना किसी ठोस प्रमाण के आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
इधर कांग्रेस के आरोपों के अगले ही दिन भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके पुत्र प्रियंक खड़गे को निशाने पर लिया। दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि खड़गे परिवार से जुड़े सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को कर्नाटक में प्रभाव का उपयोग कर बहुमूल्य भूमि आवंटित कराई गई। भाजपा का दावा है कि इस ट्रस्ट में खड़गे परिवार के सदस्य जुड़े हुए हैं और भूमि आवंटन प्रक्रिया में सत्ता और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।।
भाजपा के अनुसार वर्ष 2024 में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा ट्रस्ट को पांच एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। यह भूमि एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान गतिविधियों के लिए दी गई बताई गई, लेकिन भाजपा का आरोप है कि इसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये है और इसके आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। भाजपा का कहना है कि इतनी मूल्यवान भूमि किसी औद्योगिक या विशेष अनुसंधान संस्था को मिलनी चाहिए थी, जबकि यहां प्रभाव का उपयोग कर लाभ प्राप्त किया गया।
इन आरोपों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज हो गया है। दोनों दल एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार, प्रभाव के दुरुपयोग और भूमि घोटालों में संलिप्त होने के आरोप लगा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी भी मामले में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूमि और संपत्ति से जुड़े ये आरोप आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। विशेष रूप से तब, जब दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे के शीर्ष नेताओं और उनके परिवारों को सीधे निशाने पर ले रहे हों। फिलहाल जनता और राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी और क्या आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं या नहीं। तब तक यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में जारी रहने की संभावना है।









