भोपाल ब्यूरो
लेखिका संघ द्वारा राज्यस्तरीय देशभक्ति एवं नववर्ष विशेष ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश की विभिन्न इकाइयों से जुड़ी साहित्यकार बहनों ने नववर्ष और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए जबलपुर इकाई अध्यक्ष डॉ. कामना कौस्तुभ ने कहा कि “तिरंगे का सम्मान देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। रचना-लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भावों और संवेदनाओं की साधना है।”
उन्होंने राष्ट्रगान के समय खड़े होकर सम्मान प्रकट करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए समाज को निरंतर प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा— “चिरागों की तरह सबको जलना पड़ता है, मुट्ठी बाँधने से इंकलाब नहीं आते।”
देशभक्ति और नववर्ष मंगलकामना से जुड़ी रचनाओं की उन्होंने मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मालती बसंत ने सभी रचनाकारों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए नववर्ष पर अपनी रचना भी प्रस्तुत की।
प्रांताध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने मंडला, दमोह, कटनी, जबलपुर, विदिशा, सागर, शाजापुर एवं शुजालपुर इकाइयों से जुड़ी 27 साहित्यकार बहनों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि गोष्ठी में लगभग 70 साहित्यकार बहनें ऑनलाइन उपस्थित रहीं।
काव्यपाठ करने वालों में मंडला की अर्चना जैन ने “हे मातृभूमि तेरी अर्चना अक्षत पुष्प से चाहूँ”, कटनी की मीरा भार्गव ने “दसों दिशाओं में गूँज रहा है जय भारत का नाद”, विदिशा की रेखा दुबे ने “मेरे विकसित भारत की यह पहचान…”, दमोह की प्रेमलता नीलम ने “प्यारा सबका हिंदुस्तान, हम सब भारत की संतान”, विदिशा की निशा सक्सेना ने “किसी की चूड़ियों को चहकता छोड़ आया हूँ” तथा दमोह की डॉ. इंद्रजीत भट्टी ने “गुज़रे बरस की दहलीज पर कुछ अधूरे, कुछ टूटे सपने” का सशक्त पाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन कमल चंद्रा ने किया। सरस्वती वंदना कल्पना विजयवर्गीय ने प्रस्तुत की। ऑनलाइन तकनीकी व्यवस्था महिमा वर्मा ने संभाली तथा आभार प्रदर्शन प्रेक्षा सक्सेना ने किया।










