MP. : हाईकोर्ट के आदेश के बाद धार भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा

धार. हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले के बाद धार स्थित भोजशाला में शनिवार 16 मई की सुबह से हिंदू समुदाय के लोग पूजा-पाठ करने के लिए उमड़ पड़े. कई समितियों के पदाधिकारी सुबह 5 बजे ही भोजशाला के बाहर जमा हो गए. इसके बाद भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना की. इस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया.

लोगों का कहना है वे लोग हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. भोजशाला मंदिर ही है. दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने भावुक होते हुए कहा सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है.

नमाज पढऩे की अनुमति निरस्त

शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया धार की विवादित भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती मंदिर है. इसके साथ ही ्रस्ढ्ढ के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें कहा गया था मुस्लिम समुदाय को इस जगह पर शुक्रवार की नमाज़ पढऩे की अनुमति है. हाई कोर्ट ने यहां हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दे दिया है. शनिवार को पूजा करने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के ्रस्ढ्ढ आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है. इस आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय अवधि के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी. शनिवार सुबह से ही कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे. इसके बाद मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर प्रणाम किया.

पूरी गरिमा लौटाने तक प्रयास करेंगे

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के समन्वयक गोपाल शर्मा कहते हैं, यह मेरी लड़ाई नहीं थी, बल्कि पूरे हिंदू समुदाय की लड़ाई थी. यह सिफऱ् एक जगह के लिए नहीं थी, बल्कि हिंदू और सनातन संस्कृति की जीत थी. 720 साल तक, यहां के हिंदू समुदाय ने अपमान महसूस किया और हर तरह का बलिदान दिया, लेकिन कल जो अदालत का फ़ैसला आया, वह इस बड़ी लड़ाई में सिफऱ् एक पड़ाव है. जब तक भोजशाला की पूरी गरिमा बहाल नहीं हो जाती और यह जगह वैसा रूप दोबारा हासिल नहीं कर लेती जैसा राजा भोज के समय में था, तब तक धार का हिंदू समुदाय अपने प्रयास जारी रखेगा.

लोगों से पूजा करने आने का आह्वान

गोपाल शर्मा ने कहा मुझे उन सभी लोगों की याद आती है, जिन्होंने इन सालों में इस आंदोलन का नेतृत्व किया और जिन्होंने इसे आम लोगों तक पहुंचाया. उनके प्रयासों की वजह से ही यह आंदोलन दूर-दूर तक पहुंचा. भोजशाला अब मां सरस्वती-कंठाभरण के नाम से जानी जाएगी. मैं हिंदू समुदाय से अपील करता हूं कि वे यहां आएं, पूजा-अर्चना करें और इसे एक मंदिर की तरह मानें, ताकि इसकी पूरी बहाली हो सके.

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