नई दिल्ली। भारतीय संसद में हाल ही में पेश किए गए एक बयान के अनुसार, 2020 से 2025 तक लगभग 9 लाख भारतीय नागरिकों ने स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता त्याग दी। यह जानकारी विदेश मंत्रालय (MEA) ने साझा की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अवसरों, परिवार पुनर्मिलन और बेहतर आर्थिक संभावनाओं की तलाश में कई भारतीय नागरिक अपने देश की नागरिकता छोड़ रहे हैं।
भारतीय नागरिकता त्यागना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसे अपनाकर व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है या अपने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय नागरिकता नहीं बनाए रखना चाहता। भारतीय कानून के अनुसार, एक बार नागरिकता formally त्याग दी जाने के बाद द्वैध नागरिकता की अनुमति नहीं होती। ऐसे नागरिकों को ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ़ इंडिया (OCI) कार्ड प्रदान किया जाता है, जो उन्हें भारत में जीवनभर निवास और यात्रा की सुविधा देता है।










