दिग्विजय का भाजपा पर हमला: बुंदेलखंड में दो तरह की भाजपा—‘शुद्ध भाजपाई’ भार्गव-भूपेंद्र और ‘पंजा छाप’ गोविंद राजपूत

सागर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को सागर में आयोजित पत्रकार वार्ता में बुंदेलखंड की भाजपा की राजनीति को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा के भीतर नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि और निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बुंदेलखंड में इस समय भाजपा के दो अलग-अलग चेहरे दिखाई देते हैं—एक गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह वाली ‘शुद्ध भाजपाई’ भाजपा, जबकि दूसरी गोविंद सिंह राजपूत की ‘पंजा छाप’ भाजपा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में सत्ता का भरपूर लाभ लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में भी राजपूत परिवहन विभाग लेकर सत्ता के सुख में रहे और भाजपा सरकार में आने के बाद भी वही विभाग उनके पास रहा। उनके मुताबिक, राजपूत की राजनीतिक यात्रा को देखकर यह फर्क साफ दिखाई देता है कि कौन वैचारिक रूप से भाजपा में रहा और कौन सत्ता के साथ पाला बदलकर आगे बढ़ा।
गोपाल-भूपेंद्र शुद्ध भाजपाई, राजपूत पंजा छाप’
दिग्विजय सिंह ने पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को भाजपा का पुराना और वैचारिक चेहरा बताते हुए कहा कि दोनों ‘शुद्ध भाजपाई’ हैं। वहीं गोविंद सिंह राजपूत को उन्होंने ‘पंजा छाप भाजपाई’ कहकर निशाना साधा।
उन्होंने गोपाल भार्गव के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि 1984 में भार्गव युवा कांग्रेस में थे और रहली से टिकट की इच्छा रखते थे। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और आज भी भाजपा में हैं।
सिर्फ दल बदला या सियासत का चरित्र भी?
दिग्विजय सिंह के इस बयान का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर बुंदेलखंड भाजपा के तीन प्रमुख नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि को एक ही तराजू पर रख दिया। उनका निशाना केवल गोविंद सिंह राजपूत पर नहीं था, बल्कि उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा में लंबे समय से विचारधारा के साथ खड़े नेताओं और सत्ता के साथ राजनीतिक पाला बदलने वाले नेताओं के बीच फर्क है।
उनके बयान में ‘शुद्ध भाजपाई’ बनाम ‘पंजा छाप भाजपाई’ का इस्तेमाल आने वाले समय में बुंदेलखंड की राजनीति में नया राजनीतिक मुहावरा बन सकता है। खासकर सागर संभाग की राजनीति में गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत तीनों का अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव है। ऐसे में दिग्विजय का यह हमला भाजपा के भीतर नेतृत्व, निष्ठा और सत्ता-समीकरण की बहस को सीधे सामने ले आता है।
दिग्विजय सिंह का मूल राजनीतिक संदेश साफ था—भाजपा में होने मात्र से सभी नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि और निष्ठा एक जैसी नहीं है। कोई विचारधारा के साथ आया, तो कोई सत्ता के साथ।

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