बिना निर्धारित योग्यता के शिक्षक नियुक्त नहीं किए जा सकते, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

नई दिल्ली. स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति तथा उन्हें सरकारी सेवा में समायोजित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित आवश्यक शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को ही शिक्षक के रूप में नियुक्त या समायोजित किया जा सकता है. बिना निर्धारित वैधानिक योग्यता वाले व्यक्तियों को शिक्षक के पद पर नियुक्त या सेवा में समायोजित करने की अनुमति नहीं होगी. यह निर्देश विशेष रूप से उन वैधानिक योजनाओं को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया है, जिनके तहत शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी सेवा में शामिल करने का प्रावधान किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर यह निर्देश दिया. पीठ ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति या समायोजन तभी किया जाए, जब संबंधित उम्मीदवार के पास शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता हो. मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी किया है और याचिका पर आगे सुनवाई बाद की तारीख में होगी.

योग्यता के बिना नियुक्ति पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में शिक्षकों की वैधानिक योग्यता को सीधे नियुक्ति और समायोजन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है. पीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित योग्यता पूरी किए बिना किसी व्यक्ति को स्कूल या कॉलेज में शिक्षक के रूप में नियुक्त या समायोजित नहीं किया जा सकता.

इस आदेश का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि याचिका में उन व्यवस्थाओं को चुनौती दी गई है, जिनके माध्यम से कुछ शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमित सरकारी सेवा में शामिल करने का रास्ता बनाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी सेवा में शामिल करने से पहले निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.

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