राजीव रंजन श्रीवास्तव, सागर
सरकार ने बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को आर्थिक मजबूती देने के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की, लेकिन सागर में विभागीय लापरवाही ने इसी योजना के लाभ को बेटियों से दूर कर दिया है। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी कर चुकीं अनेक लाड़ली लक्ष्मी छात्राओं के खातों में अब तक योजना की राशि नहीं पहुंची है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राएं कॉलेज में प्रवेश के लिए फीस जुटाने की जद्दोजहद कर रही हैं। परिवारों को उम्मीद थी कि योजना की राशि समय पर मिलेगी और उससे कॉलेज की फीस जमा करने में मदद मिलेगी, लेकिन विभागीय प्रक्रिया की सुस्ती ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी।
सूत्रों के अनुसार बड़ी संख्या में छात्राओं के प्रकरण समग्र आईडी के सत्यापन में अटके हुए हैं। आंगनबाड़ी स्तर पर छात्राओं से संबंधित रिकॉर्ड का समय पर सत्यापन नहीं होने के कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं तो उनके दस्तावेज और समग्र आईडी का सत्यापन समय पर क्यों नहीं किया गया?
- सत्यापन की एक प्रक्रिया, महीनों का इंतजार
लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं में रिकॉर्ड और समग्र आईडी का सत्यापन अहम है। लेकिन कई मामलों में यही प्रक्रिया छात्राओं के लिए सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। विभागीय स्तर पर समय पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने से पात्र छात्राओं का भुगतान लंबित बताया जा रहा है।
योजना का उद्देश्य बेटियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देना है, लेकिन राशि तब अटक रही है जब छात्राओं को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। 12वीं के बाद कॉलेज में प्रवेश के समय फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्च परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर लेटलतीफी के आरोप
सूत्र बताते हैं कि कई प्रकरणों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा छात्राओं की समग्र आईडी का सत्यापन समय पर नहीं किया गया। यदि यह जानकारी समय रहते अपडेट और सत्यापित कर दी जाती तो भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती थी।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग ने लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा की? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
सुपरवाइजरों की निगरानी पर भी सवाल
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के काम की निगरानी के लिए सुपरवाइजर स्तर पर व्यवस्था है। यदि बड़ी संख्या में छात्राओं के प्रकरण सत्यापन के अभाव में लंबित हैं तो सुपरवाइजरों ने इन मामलों की समय रहते समीक्षा क्यों नहीं की?
लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर जिम्मेदारों से जवाब मांगने और समय सीमा तय कर सत्यापन पूरा कराने की जरूरत है। वरना योजना का लाभ देने के लिए सरकार द्वारा खर्च किया जा रहा पैसा और पूरी व्यवस्था कागजी प्रक्रिया में ही उलझी रहेगी।
कॉलेज में एडमिशन की चिंता, योजना की राशि का इंतजार
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं के लिए योजना की राशि महज सरकारी सहायता नहीं, बल्कि पढ़ाई जारी रखने का सहारा है। कई परिवारों का कहना है कि यदि राशि समय पर मिल जाती तो कॉलेज की फीस जमा करने में मदद मिलती।
एक ओर बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, दूसरी ओर पात्र छात्राओं को अपने हक की राशि के लिए विभागीय सत्यापन का इंतजार करना पड़ रहा है।
अब विभाग को बताना होगा—कितनी बेटियां और कितने दिन इंतजार करेंगी?
महिला एवं बाल विकास विभाग को जिले में लंबित सभी लाड़ली लक्ष्मी प्रकरणों की ब्लॉकवार समीक्षा करानी चाहिए। कितनी छात्राओं की समग्र आईडी सत्यापित नहीं हुई, कितने प्रकरण भुगतान के लिए लंबित हैं और किस स्तर पर देरी हुई—इसकी जानकारी सामने आना जरूरी है।
साथ ही जिन मामलों में लापरवाही सामने आए, उनमें जिम्मेदारी तय कर तत्काल सत्यापन कराया जाए, ताकि पात्र छात्राओं को उनकी राशि समय पर मिल सके और उनकी कॉलेज की पढ़ाई विभागीय लेटलतीफी की भेंट न चढ़े।


