सागर ब्यूरो
मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने 8 अगस्त से प्रदेशव्यापी बस हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। सागर में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया। बस ऑपरेटरों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, जिससे संचालन लगातार घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष पाण्डेय
ने बताया कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, बीमा, टैक्स और कर्मचारियों के वेतन सहित संचालन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बस किराए में उसी अनुपात में संशोधन नहीं किया गया। इसके अलावा अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार का सकारात्मक रुख नहीं दिखा। ऐसे में मजबूर होकर 8 अगस्त से बसों का संचालन बंद करने का निर्णय लिया गया है।
यदि तय तारीख से पहले सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच सहमति नहीं बनती है तो प्रदेशभर में हजारों निजी बसों के पहिए थम जाएंगे। इसका सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों के आवागमन पर पड़ेगा।
बस ऑपरेटरों की प्रमुख मांगें
बस किराए में तत्काल बढ़ोतरी।
बढ़ती संचालन लागत के अनुरूप राहत पैकेज।
टैक्स एवं अन्य शुल्कों में राहत। परिवहन व्यवसाय से जुड़ी लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान।
यात्रियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
हड़ताल लागू होने पर प्रदेश के अधिकांश निजी रूट प्रभावित होंगे। खासकर जिला मुख्यालयों से ग्रामीण क्षेत्रों और अंतरजिला मार्गों पर बस सेवा ठप होने से यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अतिरिक्त खर्च और परेशानी उठानी पड़ सकती है। अब सबकी निगाहें सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।


