एमपी में 9 साल से बंद छात्रसंघ चुनाव पर हाईकोर्ट तल्ख, सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब

राजीव रंजन श्रीवास्तव, सागर 

मध्य प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए दो सप्ताह के भीतर स्पष्ट स्थिति बताने के निर्देश दिए हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर प्रस्तुत किया जाए, जिसमें छात्रसंघ गठन और चुनाव की पूरी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख हो. अदालत ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी भी मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है.

यह मामला छात्रसंघ चुनाव नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता अदनान अंसारी की ओर से अधिवक्ता अक्षरदीप ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश के शासकीय उच्च शिक्षा संस्थानों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है. उन्होंने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित लिंगदोह समिति की सिफारिशों का राज्य सरकार प्रभावी ढंग से पालन नहीं कर रही है, जिससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर अंतिम चरण में तैयार किया जा रहा है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस बार कैलेंडर में छात्रसंघ गठन और चुनाव संबंधी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा. इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर संशोधित अकादमिक कैलेंडर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए सरकार क्या व्यवस्था कर रही है.

याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई है. छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को संस्थागत रूप से उठाने के अवसर से वंचित हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि सरकार को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप नियमित छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए जाएं.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखना आवश्यक है और यदि छात्रसंघ चुनाव संबंधी प्रावधान अकादमिक कैलेंडर का हिस्सा हैं तो उनका पालन भी सुनिश्चित होना चाहिए. अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अकादमिक कैलेंडर और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकेगा कि प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लगभग नौ वर्षों से बंद छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू होने का रास्ता कब और कैसे खुलेगा.

और पढ़ें

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!