जबलपुर. रेप पीडि़ता को आर्थिक मदद मिलने के बाद उसे एक एफिडेविट पेश करना होगा. जिसमें लिखा जाएगा कि पीडि़ता सहायता राशि लेने के बाद अपने बयान से न मुकरेगी और न ही आरोपी से समझौता करेगी.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम) के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है. जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने फैसले में एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को दुष्कर्म के मामलों में मिलने वाली शासकीय आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि पीडि़ता को यह स्पष्ट लिखना होगा कि वह अपने आरोपों पर कायम रहेगी, जिससे इस अधिनियम का दुरुपयोग न हो.


