जबलपुर/सागर ब्यूरो
एमपी के सागर में गौरझामर स्थित देव दत्तात्रेय लोक न्यास की संपत्ति पर कथित अतिक्रमण और प्रशासनिक निष्क्रियता का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. न्यास के चार ट्रस्टियों ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट की भूमि पर भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों ने लंबे समय से अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
ट्रस्टियों का कहना है कि उन्होंने सागर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और देवरी एसडीएम को कई बार लिखित शिकायतें देकर अतिक्रमण हटाने, भूमि का सीमांकन कराने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट की भूमि पर बिना किसी सक्षम अनुमति के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है, जबकि वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर ट्रस्ट की संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे. ट्रस्टियों का दावा है कि इस आदेश के बावजूद निर्माण कार्य कराया गया, जो न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है.
चार ट्रस्टियों के नाम हटाए गए थे-
मामले में यह भी आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम स्तर पर ट्रस्ट रजिस्टर से चार ट्रस्टियों के नाम हटाए गए थे, जिसे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अवैध घोषित कर दिया था. बाद में इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगाई, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. ट्रस्टियों ने याचिका में सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल, देवरी एसडीएम मुनब्बर खान और तहसीलदार प्रीति चौरसिया के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 215 तथा न्यायालय अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद प्रशासन द्वारा आवश्यक कदम नहीं उठाए गए.
कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई-
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107/116 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, जबकि ट्रस्ट की भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण कार्य को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. इसके अलावा ट्रस्टियों ने रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट से वर्ष 2001 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक ट्रस्ट की आय-व्यय संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग की है. मामले की पैरवी आरपीएस लॉ एसोसिएट्स के अधिवक्ता यशवंत सिंह लोधी, अभिलाषा सिंह और काजल विश्वकर्मा द्वारा की जा रही है. ट्रस्टियों का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों का पालन कराया जाता और समय रहते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती, तो उन्हें न्यायालय की शरण में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती.










