नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी सेवाओं में कार्यरत आयुष (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध) और एलोपैथी डॉक्टरों के लिए समान सेवा शर्तों जैसे सेवानिवृत्ति की आयु और वेतनमान की मांग से जुड़ी याचिका को अब एक बड़ी पीठ (लार्जर बेंच) के पास भेज दिया है. शीर्ष अदालत ने इस मामले की जटिलता और इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए विस्तृत न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता बताई है. न्यायालय ने स्पष्ट रूप से नोट किया है कि जहां एलोपैथी डॉक्टर गंभीर और जीवन रक्षक देखभाल (critical life-saving care) प्रदान करते हैं, वहीं आयुष चिकित्सकों का प्रशिक्षण और कार्यप्रणाली इससे भिन्न है, जो सेवा शर्तों में अंतर को उचित ठहराता है.
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने विभिन्न राज्यों से आई विशेष अनुमति याचिकाओं (Special Leave Petitions) पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया. इन याचिकाओं में एलोपैथी डॉक्टरों और स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों का अभ्यास करने वालों के लिए भिन्न सेवा शर्तों को चुनौती दी गई थी. कई राज्यों में एलोपैथी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है, जबकि आयुष चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष है. इसके अतिरिक्त, दोनों स्ट्रीम के वेतनमानों में भी विसंगतियां मौजूद हैं.











