राज्यपाल की बिना अनुमति के किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट जारी नहीं की जा सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज संवाददाता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना राज्यपाल की अनुमति के किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच या चार्जशीट जारी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुशासनात्मक कार्यवाही केवल सेवारत कर्मचारियों के लिए होती है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार की एकलपीठ ने आगरा के आनंद स्वरूप दोहरे की याचिका पर दिया।पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद आनंद स्वरूप को चार्जशीट दी गई थी और उनकी पेंशन व ग्रेच्युटी रोक दी गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद सेवानिवृत्ति के बाद चार्जशीट देने को नियमों के खिलाफ माना। ऐसा करने से पहले राज्यपाल की अनुमति नहीं ली गई थी। कोर्ट ने वित्त नियंत्रक विभाग, पुलिस मुख्यालय, लखनऊ को आदेश दिया है कि वह छह सप्ताह के अंदर आनंद स्वरूप को उनकी पूरी बकाया राशि और ग्रेच्युटी वापस करे। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो विभाग को सेवानिवृत्ति की तारीख से भुगतान होने तक 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।

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