वोकल फॉर  लोकल की धमक विदेशों तक में पहुंची, डेकोरेटिव आर्ट में माहिर 18 साल की जया

छतरपुर ब्यूरो 
आधुनिकता के इस दौर में वोकल फॉर लोकल की धमक विदेशों तक में पहुंच चुकी है। जिले में निर्मित स्वदेशी उत्पादों की न सिर्फ दिनोंदिन डिमांड बढ़ रही है बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। लोकल फॉर वोकल की राह पर चलकर युवाओं का रुझान स्वयं के उत्पादों की ओर बढ़ा है। खजुराहो की ही 18 वर्षीय जया रजक के मन में दो साल पहले क्रिएटिव वर्क करने की ललक जागी। पहले मन में कई तरह के आइडिया आए, लेकिन वह कुछ ऐसा करना चाहती थी कि जिसमें स्वदेशी की झलक दिखे। चूंकि उसकी दादी अपने हाथों से घर को सजाने वाली सामग्री बनाती थी, बस यहीं से जया ने क्रिएटिव वर्क करने का रास्ता चुना और डेकोरेटिव आइटम बनाने जुट गईं, लेकिन यह काम इतना आसान भी नहीं था। विभिन्न माध्यमों के जरिए दो साल तक ट्रेनिंग ली। इसके बाद काम शुरू किया। जया अभी तक क्रोशिया के फूल, गमले, हैंड बैग, मेट, टोड बैग, की चैन, ब्रेसलेट, गजरा जैसे कई इक्को फ्रेंडली आइटम्स बना रही हंै। इन आइटम की अधिकतर विदेशों में ज्यादा पसंद किया जा रहा है। खजुराहो में ही उन्होंने डेकोरेटिव होम खोल रखा है, जहां देशी-विदेशी पर्यटक उनके हाथ से बने न सिर्फ सामान खरीदते हैं, बल्कि सराहना भी करते हैं। अधिकांश सामान की ऑनलाइन बुकिंग होती है। जया ने हाल ही में कॉलेज में दाखिला लिया है। वह कहती हैं कि रोजगार के अवसर चलकर नहीं आते, हमें स्वयं तैयार करना पड़ते हैं, इसलिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए, निराशावादी सोच को त्यागना होगा।

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