जबलपुर. पुलिस ने हत्या के मामले में जांच के लिए सैंपल एफएसएल सागर भेजे थे. लेकिन सैंपल की जांच रिपोर्ट जबलपुर एफएसएल द्वारा तैयार की गयी. इसे गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि गलत रिपोर्ट जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ 7 दिन में कार्रवाई करें. याचिका पर अगली सुनवाई 15 सितम्बर को निर्धारित की गयी है.
हत्या मामले में 5 लोगों को आजीवन कारावास
मामले के अनुसार कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र के कछगवां स्थित सिमको कंपनी के मैनेजर समनू प्रसाद विश्वकर्मा की हत्या के अपराध में जिला न्यायालय ने 16 दिसंबर 2025 महिला सहित 5 आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया था. इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की गयी. अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि रिकॉर्ड के अनुसार शव की खोपड़ी का सैंपल जांच के लिए एफएसएल सागर भेजा गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट एफएसएल जबलपुर द्वारा तैयार की गयी.
एसीएस ने हलफनामा पेश कर गलती स्वीकार
एफएसएल रिपोर्ट में की गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने एसीएस होम से स्पष्टीकरण मांगा था. इसमें पूछा गया जब सैंपल सागर भेजे गये थे तो रिपोर्ट जबलपुर लैब में कैसे तैयार की गयी. युगलपीठ ने इस संबंध में एसीएस होम को नोटिस जारी किया. एसीएस की तरफ से पेश किये गये हलफनामा में गलती को स्वीकार की गई. युगलपीठ ने पेश किये गये हलफनामा को रिकॉर्ड में लेने के निर्देश दिए. युगलपीठ ने चेतावनी दी है दोषी कर्मचारी व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर एसीएस होम व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हों.






