बांग्लादेश में बड़ा राजनैतिक बदलाव, बीएनपी के मिर्जा फखरुल राष्ट्रपति बने

ढाका. बांग्लादेश की राजनीति में गुरुवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला. सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के नए राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं. संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में 78 वर्षीय आलमगीर ने विपक्षी उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को 255-88 के अंतर से हराया. बांग्लादेश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार मुकाबले वाला चुनाव हुआ है. इससे पहले 1991 के बाद राष्ट्रपति पद के चुनाव में इस तरह का सीधा मुकाबला नहीं हुआ था.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर एएमएम नासिर उद्दीन ने मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद परिणाम की घोषणा की. राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. इस बार कुल 349 सांसद राष्ट्रपति चुनाव में मतदान के लिए पात्र थे. इनमें से 343 सांसदों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जबकि छह सांसदों ने मतदान नहीं किया. मतदान गुरुवार दोपहर राष्ट्रीय संसद भवन में शुरू हुआ और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा किया गया.

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को सत्तारूढ़ BNP ने राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया था, जबकि उनके सामने कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद विपक्षी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे. ओली अहमद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष हैं और उन्हें जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन का समर्थन प्राप्त था. हालांकि संसद में BNP और उसके सहयोगियों के पास मजबूत बहुमत होने के कारण आलमगीर की जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी. चुनाव परिणाम में भी यही तस्वीर सामने आई और उन्होंने 255 वोट हासिल कर स्पष्ट बहुमत से जीत दर्ज की.

राष्ट्रपति चुनाव का यह मुकाबला बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने थे. इससे पहले राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव निर्विरोध या एकतरफा तरीके से होने की स्थिति अधिक रही है. इस बार संसद में मतदान के दौरान सत्तारूढ़ दल और विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार के बीच औपचारिक मुकाबला हुआ. चुनाव के नतीजे ने BNP के राजनीतिक प्रभुत्व को भी स्पष्ट किया है. फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव के बाद BNP सत्ता में लौटी थी और पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद अब उसके वरिष्ठ नेता को देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद मिला है.

आलमगीर लंबे समय से BNP की राजनीति में सक्रिय रहे हैं. वह पार्टी के महासचिव के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान BNP के प्रमुख विपक्षी चेहरों में शामिल रहे. राजनीतिक जीवन में आने से पहले वह शिक्षक के रूप में काम कर चुके हैं. इसके अलावा वह सरकार में मंत्री और राज्यमंत्री की जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं. 1990 के दशक में BNP से जुड़ने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता गया और वर्ष 2016 से वह पार्टी के महासचिव के पद पर रहे.

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