हेलमेट बैंक से ट्रैफिक पार्क तक… छतरपुर के नवाचारों का दावा, हादसों में मौतें 30% घटी

छतरपुर ब्यूरो 
सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए छतरपुर यातायात पुलिस ने हेलमेट बैंक से लेकर ट्रैफिक पार्क तक कई नवाचार किए हैं। यातायात पुलिस का दावा है कि इन प्रयासों के चलते इस साल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस मामले में छतरपुर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।
यातायात पुलिस ने जिले में आठ ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए हैं। पुलिस के अनुसार, इन स्थानों पर इस साल केवल दो सड़क हादसे हुए हैं। हादसों में कमी लाने के लिए जागरूकता अभियान, हेलमेट के उपयोग को बढ़ावा देने और स्कूली विद्यार्थियों को यातायात नियमों का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है।
6 हजार लोगों ने हेलमेट बैंक का लाभ लिया
यातायात प्रभारी बृहस्पति साकेत के मुताबिक, वर्ष 2025 से जिले में प्रदेश का पहला हेलमेट बैंक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बाइक चालकों को हेलमेट पहनने के प्रति जागरूक करना है। जरूरत पड़ने पर बाइक सवारों को हेलमेट उपलब्ध कराया जाता है, जिसे उपयोग के बाद वापस जमा करना होता है। अब तक 6 हजार से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं।
ट्रैफिक समर कैंप में 600 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
युवाओं को यातायात नियमों की जानकारी देने के लिए जिले में सात दिवसीय ट्रैफिक समर कैंप आयोजित किया गया। इसमें 600 युवाओं ने हिस्सा लिया। यातायात पुलिस के अनुसार, इस नवाचार की पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने भी सराहना की है। इसका उद्देश्य युवाओं को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति जागरूक करना है।
ट्रैफिक पार्क में 5 हजार विद्यार्थियों को सिखाए नियम
जिले में आधुनिक वातावरण में यातायात नियमों का प्रशिक्षण देने के लिए ट्रैफिक प्रशिक्षण शाला और ट्रैफिक पार्क तैयार किया गया है। यहां विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों की जानकारी दी जा रही है। पुलिस के अनुसार, अब तक 5 हजार विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य बच्चों में छोटी उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना है।
35 यातायात वार्डन संभाल रहे व्यवस्था
शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 35 यातायात वार्डन नियुक्त किए गए हैं। ये विशेष आयोजनों और भीड़भाड़ के दौरान यातायात पुलिस की मदद करते हैं। इसके अलावा जिले में करीब एक हजार ऑटो और 800 ई-रिक्शा पर सीरियल नंबर चस्पा किए गए हैं, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके।
गुम सामान और हादसे के मामलों में मिलेगी मदद
ऑटो और ई-रिक्शा पर सीरियल नंबर दर्ज होने से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। किसी यात्री का सामान वाहन में छूटने या किसी ऑटो चालक से दुर्घटना होने की स्थिति में वाहन की पहचान करना आसान हो सकता है। इससे संबंधित वाहन और चालक तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिल सकती है।

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