नई दिल्ली. चिकित्सा जगत को झकझोर देने वाले एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (एनसीडीआरसी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डॉक्टर को घोर लापरवाही का दोषी ठहराया है. आयोग ने उत्तर प्रदेश के एक सर्जन को आदेश दिया है कि वह उस महिला के परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा दे, जिसकी मौत गलत किडनी निकाल दिए जाने के कारण हो गई थी. आयोग ने इस मामले को “चिकित्सकीय लापरवाही की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक” बताते हुए कहा कि ऐसा मामला अदालतों और न्यायाधिकरणों के सामने बहुत कम देखने को मिलता है.
यह मामला वर्ष 2012 का है. मृतक महिला शांति देवी, जिनकी उम्र उस समय 56 वर्ष थी, पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंची थीं. जांच में पता चला कि उनकी दाहिनी किडनी गंभीर रूप से खराब थी और उसमें हाइड्रोनेफ्रोसिस नामक बीमारी थी. मेडिकल रिपोर्टों और स्कैन में साफ तौर पर दर्ज था कि महिला की बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ है, जबकि दाहिनी किडनी खराब है और उसे निकालने की जरूरत है. इसके बाद डॉक्टर ने महिला की सर्जरी करने का निर्णय लिया.
आयोग के अनुसार 6 मई 2012 को महिला का ऑपरेशन किया गया, लेकिन सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने गंभीर चूक करते हुए खराब दाहिनी किडनी की जगह स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी. शुरुआत में परिवार को इस गलती की जानकारी नहीं दी गई. बाद में जून 2012 में कराई गई रेडियोलॉजिकल जांच और सीटी स्कैन में खुलासा हुआ कि महिला की खराब दाहिनी किडनी अब भी शरीर में मौजूद है, जबकि स्वस्थ बाईं किडनी गायब है.
इस खुलासे के बाद परिवार स्तब्ध रह गया और डॉक्टर के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की गई. मामले की सुनवाई के दौरान डॉक्टर ने भी अपने लिखित जवाब में यह स्वीकार किया कि “दाहिनी तरफ चीरा लगाया गया था, लेकिन बाईं किडनी निकाल दी गई.” आयोग ने इसे चिकित्सा क्षेत्र की बेहद गंभीर और अक्षम्य लापरवाही माना. आयोग ने चिकित्सक पर 2 करोड़ का जुर्माना लगाया है।










