10 अप्रैल से देशभर के टोल प्लाजा होंगे कैशलेस, Fastag और UPI से होगा भुगतान

नई दिल्ली.सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश के राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों वाहन स्वामियों के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। नई गजट अधिसूचना के अनुसार, आगामी 10 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के किसी भी टोल प्लाजा पर नकद (कैश) भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य टोल बूथों पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करना और यातायात को सुगम बनाना है। अब हर वाहन के लिए वैध फास्टैग (FASTag) होना अनिवार्य होगा, और विकल्प के तौर पर यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान की सुविधा दी जाएगी। यदि किसी वाहन में फास्टैग नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तो चालक को डिजिटल माध्यम से भुगतान के लिए केवल 72 घंटे का समय मिलेगा, जिसके बाद पेनाल्टी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, नेशनल हाईवे फीस रूल्स के नियम 14 को अब और सख्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई वाहन चालक टोल का भुगतान करने में विफल रहता है, तो अधिकारियों के पास उस वाहन को टोल प्लाजा में प्रवेश देने से रोकने या उसे वहां से हटाने का पूरा अधिकार होगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जुर्माने की राशि को लेकर किया गया है। यदि टोल की बकाया राशि का भुगतान 3 दिनों यानी 72 घंटों के भीतर नहीं किया जाता है, तो देय राशि दोगुनी हो जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फास्टैग मुख्य भुगतान पद्धति बनी रहेगी, लेकिन तकनीकी खराबी या फास्टैग न होने की स्थिति में यूपीआई एक बैकअप के तौर पर काम करेगा ताकि वाहन को रोका न जाए और ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने।

देशभर के लगभग 1150 टोल बूथों पर यह कैशलेस व्यवस्था एक साथ लागू की जा रही है, जिसमें प्रमुख एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। सरकार के इस डिजिटल पुश से निजी वाहन मालिकों के साथ-साथ कमर्शियल वाहन चालकों और परिवहन कंपनियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस सिस्टम से टोल कलेक्शन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी, जिससे यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। हालांकि, इस घोषणा के बाद से ही आम जनता के बीच कुछ चिंताएं भी देखी जा रही हैं। कई यात्रियों का मानना है कि दूर-दराज के इलाकों में नेटवर्क की समस्या, फास्टैग का अचानक डिएक्टिवेट हो जाना या सर्वर डाउन होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और बेवजह भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।

सरकार ने इस नई व्यवस्था को ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस से भी जोड़ दिया है। यदि कोई वाहन चालक निर्धारित 72 घंटों में दोगुना भुगतान नहीं करता है, तो 15 दिनों के बाद उस वाहन के खिलाफ राष्ट्रीय वाहन डेटाबेस में “उचित प्रतिबंध” दर्ज कर दिए जाएंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में उस वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा या ट्रांसफर जैसे कार्यों में रुकावट आ सकती है। मंत्रालय का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने से टोल बूथों पर मैन्युअल काम कम होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म होगी। 10 अप्रैल के बाद नेशनल हाईवे पर सफर करने से पहले अब हर यात्री को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके फास्टैग वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस है या उनके पास सक्रिय यूपीआई सुविधा मौजूद है, अन्यथा एक छोटी सी चूक उनकी जेब पर भारी पड़ सकती है। यह कदम भारत के सड़क बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।

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