जबलपुर ब्यूरो
एमपी के सागर में बीना विधानसभा से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर आज फिर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान निर्मला सप्रे ने कोर्ट के समक्ष कहा कि मैं अब भी कांग्रेस में हूं. इस बयान को कोर्ट ने रिकार्ड में लेते हुए याचिकाकर्ता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सबूत पेश करने के लिए समय दिया है.
अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी. उमंग सिंघार 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप की प्रतियां हाईकोर्ट में पेश करेंगे. इसी दिन विधानसभा स्पीकर के सामने अहम सुनवाई होगी. गौरतलब है कि बीना विधानसभा सीट से निर्मला सप्रे ने कांग्रेस में रहतेे हुए चुनाव जीता था. 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान निर्मला सप्रे ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बीना विधायक की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा स्पीकर के समक्ष याचिका दायर की थी. आरोप लगाया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी बदलने पर विधायक की सदस्यता स्वत समाप्त हो जाती हैए लेकिन जब इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की.
31 मार्च 2026 को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले पर जब सुनवाई की तो निर्मला सप्रे की वकील ने दावा किया कि वो अभी भी कांग्रेस की सदस्य है. उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने का ऐसे में सवाल ही नहीं उठता. शासन की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि विधानसभा स्पीकर के समक्ष मामले की सुनवाई जारी है उनके बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं.
जिस पर निर्मला सप्रे ने कहा है कि वह आज भी कांग्रेस की सदस्य है. उमंग सिंघार के अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट को बताया कि 9 अप्रैल तक पार्टी व्हिप की प्रतियां कोर्ट के समक्ष पेश करेगी. उनका कहना था कि निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने सुबूत सोशल मीडिया में मौजूद हैं. यहां तक कि सीएम मोहन यादव के साथ भी उनकी कई तस्वीरें और पोस्ट हैं.
सोशल मीडिया के सबूत को नहीं माना पुख्ता-
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोशल मीडिया के सुबूत और पोस्ट को पुख्ता आधार नहीं माना है. चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि किसी व्यक्ति द्रारा किए गए पोस्ट के आधार पर सीधे तौर पर संबंधित व्यक्ति की स्थिति तय नहीं हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता उमंग सिंघार स्पीकर के समक्ष ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, जिससे कि यह साबित हो सके कि निर्मला सप्रे ने वास्तव में दल.बदल किया है.










