एमपी में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश संशोधित किया, अब अप्रैल के पहले हफ्ते में होगी सुनवाई

जबलपुर. मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक नया आदेश पारित किया है. दो याचिकाओं को हाई कोर्ट से रिकाल कर लिया है और 52 मामले जो पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में ही रह गए थे, ट्रांसफर आर्डर में दर्ज नहीं हुए थे, उनको हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है. अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में अंतिम बहस शुरू होगी.

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण के संबंध में विचार अधीन सभी मामलों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था. सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे. इनमें से लगभग एक दर्जन मामले, जिनकी नियमित सुनवाई के लिए ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा बार-बार अनुरोध किया जा रहा था. 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी मामलों को हाई कोर्ट को वापस भेज दिया था.

रिव्यू याचिका दर्ज की गई थी

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की स्किल थी कि सुप्रीम कोर्ट का 19 फरवरी का आदेश त्रुटिपूर्ण है और त्रुटि सुधार के लिए दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विस्तृत सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित अपने आदेश 19 फरवरी 2026 में संशोधन कर 52 प्रकरण, जो मध्य प्रदेश शासन द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे. उनको भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिया गया है और दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट को वापस की गई थी, उनमें से दो एसएलपी. जिनमे दीपक कुमार पटेल विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन व हरिशंकर बरोदिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई हेतु वापस रिकॉल कर लिए गए हैं. शेष आदेश दिनांक 19 फरवरी यथावत रहेगा.

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर आज 30 मार्च 2026 को अपलोड किया गया. ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दो सुनवाई नियत हैं.

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