बेंगलुरु.एक निजी चिकित्सा महाविद्यालय में उस समय हंगामा मच गया जब एक प्राध्यापक ने कक्षा के भीतर ही छात्रा को विवाह का प्रस्ताव दे दिया. इस घटना का दृश्य सामने आने के बाद पूरे परिसर में आक्रोश फैल गया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि छात्रों ने प्राध्यापक की चप्पलों से पिटाई कर दी.
यह मामला नेलमंगला क्षेत्र स्थित Sri Siddhartha Institute of Medical Sciences and Research Centre का बताया जा रहा है, जहां एक लगभग 50 वर्षीय प्राध्यापक ने पढ़ाई के दौरान ही अपनी ही कक्षा की 19 वर्षीय छात्रा को सबके सामने प्रस्ताव दे दिया. इस पूरी घटना के दो दृश्य सामाजिक माध्यमों पर तेजी से फैल रहे हैं, जिससे यह मामला चर्चा का विषय बन गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्राध्यापक ने कक्षा के बीच में छात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि वह उसे पसंद करते हैं और यह भी दावा किया कि छात्रा पहले ही उनसे अपने प्रेम का इजहार कर चुकी है. इस दौरान वह अपने साथ मिठाई का डिब्बा भी लाए थे और अन्य छात्रों से उसे बांटने के लिए कहा. कक्षा में मौजूद छात्र-छात्राएं इस व्यवहार से हैरान रह गए.
हालांकि छात्रा ने तुरंत इस प्रस्ताव का विरोध किया और स्पष्ट रूप से कहा कि उसने ऐसा कोई प्रस्ताव कभी नहीं दिया. उसने प्राध्यापक से यह भी कहा कि यदि इस तरह की कोई बात है तो उसे महाविद्यालय के प्रधानाचार्य के सामने रखा जाए. छात्रा ने प्राध्यापक से उनके दावे के समर्थन में प्रमाण भी मांगे.
बताया जा रहा है कि प्राध्यापक बार-बार यह कहते रहे कि उनके पास ऐसे दृश्य प्रमाण हैं जो उनके दावे को साबित कर सकते हैं. लेकिन छात्रा के कड़े विरोध के बाद वह कक्षा से बाहर निकल गए और अगले दिन इस विषय पर बात करने की बात कहकर चले गए.
घटना का दूसरा दृश्य और भी चौंकाने वाला है, जिसमें कक्षा के छात्र प्राध्यापक पर भड़कते हुए नजर आते हैं. कुछ छात्रों ने गुस्से में आकर प्राध्यापक की चप्पलों से पिटाई कर दी. जिस छात्रा को प्रस्ताव दिया गया था, वह भी इस दौरान आक्रोश में दिखाई दी और उसने भी प्राध्यापक को चप्पल से मारा.
इस घटना के सामने आने के बाद महाविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बन गया. कई लोगों ने इस व्यवहार को शिक्षक के पद की गरिमा के खिलाफ बताया और इसे अधिकारों के दुरुपयोग के रूप में देखा. सामाजिक माध्यमों पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ लोगों ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के लिए होते हैं, ऐसे व्यवहार से विश्वास टूटता है.
वहीं कुछ लोगों ने छात्रों की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि कानून को हाथ में लेना उचित नहीं है. उनका मानना है कि इस तरह के मामलों में संस्थागत और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.










