नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी Iran Israel conflict की भीषण स्थिति अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आम जनजीवन पर सीधा असर डालने लगी है. ईरान और इजरायल के बीच लगातार हो रही गोलाबारी के चलते समुद्री मार्ग बाधित हो गए हैं, जिसके कारण भारत के 11 जहाज समुद्र में फंस गए हैं. इनमें दो जहाज ऐसे हैं, जिनमें रसोई गैस यानी LPG भरी हुई है, जिससे देश में गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
सूत्रों के मुताबिक यह संकट उस समय और गंभीर हो गया जब Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हो गई. यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग माना जाता है और भारत की लगभग 60 प्रतिशत LPG आपूर्ति इसी रास्ते से होती है. इस मार्ग के प्रभावित होने से गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फंसे हुए जहाजों में ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ जैसे दो प्रमुख जहाज शामिल हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में LPG लदी हुई है. इन जहाजों का सुरक्षित निकलना फिलहाल चुनौती बना हुआ है, क्योंकि युद्ध की स्थिति के कारण समुद्र में आवाजाही जोखिम भरी हो गई है. भारतीय एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और Indian Navy भी इन जहाजों की सुरक्षा और संपर्क बनाए रखने में जुटी हुई है.
बताया जा रहा है कि ईरान के अंदर भी हालात अस्थिर हैं और शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने में देरी हो रही है, जिससे फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इससे संकट और लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही है.
भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कदम उठाए हैं. सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG का पर्याप्त स्टॉक रिजर्व कर लिया गया है, ताकि आम लोगों के घरों में खाना पकाने की व्यवस्था प्रभावित न हो. इसके साथ ही कमर्शियल गैस की सप्लाई में भारी कटौती कर दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों पर असर पड़ना शुरू हो गया है.
सरकार ने राज्यों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पाइपलाइन आधारित गैस प्रणाली को तेजी से बढ़ाएं. Piped Natural Gas यानी PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने यह भी घोषणा की है कि जो शहर तेजी से PNG नेटवर्क विकसित करेंगे, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त कमर्शियल गैस उपलब्ध कराई जाएगी.










