हाईकोर्ट का फैसला : एमपी में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सैलरी में होगी बंपर बढ़ोतरी, 2018 से एरियर भी मिलेगा

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक युगांतरकारी निर्णय सुनाते हुए सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों के पक्ष में बड़ा आदेश जारी किया है जिससे चिकित्सा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है. जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों को उनके अंतिम आहरित वेतन पर आठ प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ अनिवार्य रूप से दिया जाए. यह फैसला न केवल डॉक्टरों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा बल्कि प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था में विशेषज्ञों को रोकने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा. कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार की उस पुरानी और त्रुटिपूर्ण व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया है जिसके तहत डॉक्टरों की वेतन वृद्धि की गणना उनके प्रारंभिक मूल वेतन के आधार पर की जा रही थी. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि हर साल केवल शुरुआती वेतन पर ही इंक्रीमेंट दिया जाएगा तो डॉक्टर के वेतन में वास्तविक वृद्धि कभी संभव ही नहीं होगी और यह उनके साथ एक प्रकार का अन्याय होगा.

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण और वित्तीय प्रभाव वाला पक्ष यह है कि हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को वर्ष 2018 से अब तक का सारा बकाया यानी एरियर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है. इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रदेश के सैकड़ों विशेषज्ञों के बैंक खातों में जल्द ही लाखों रुपयों की बकाया राशि जमा होगी जो पिछले कई वर्षों से प्रशासनिक पेचीदगियों के कारण अटकी हुई थी. यह याचिका सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर्स एसोसिएशन रीवा द्वारा दायर की गई थी लेकिन इस फैसले का लाभ अब इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों को मिलेगा. कोर्ट ने प्रशासन द्वारा जारी उस स्पष्टीकरण को भी मनमाना और अवैध करार दिया है जिसमें वेतन वृद्धि को केवल शुरुआती वेतन तक सीमित रखने की कोशिश की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के बाद अब सरकारी सेवा में उच्च शिक्षित डॉक्टरों का मोहभंग कम होगा और वे निजी अस्पतालों के भारी-भरकम पैकेज को छोड़कर सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के लिए अधिक प्रोत्साहित होंगे.

वेतन वृद्धि के अलावा हाईकोर्ट ने एक और क्रांतिकारी निर्देश दिया है जो डॉक्टरों की कार्यक्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा. अदालत ने कहा है कि सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों को उनके द्वारा किए गए ऑपरेशनों और जटिल उपचारों से मिलने वाले कुल राजस्व का बीस प्रतिशत हिस्सा प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाए जैसा कि नियमावली में पहले से ही प्रावधान था लेकिन धरातल पर क्रियान्वित नहीं हो रहा था. इस कदम से सरकारी अस्पतालों में जटिल सर्जरी और विशेषज्ञ उपचार की संख्या में इजाफा होने की संभावना है क्योंकि डॉक्टरों को उनकी मेहनत का सीधा आर्थिक प्रतिफल मिलेगा. जबलपुर हाईकोर्ट के इस फैसले ने प्रदेश सरकार के वित्त विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के भीतर भी हलचल मचा दी है क्योंकि एरियर के भुगतान और भविष्य की बढ़ी हुई सैलरी के कारण सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपयों का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी संवर्गों के लिए भी एक नजीर बनेगा जहाँ वेतन गणना को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है.

और पढ़ें

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!