आगामी 3 मार्च 2026 को पूरे भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण का खगोलीय नजारा दिखाई देने वाला है जिसे लेकर ज्योतिष जगत और आम नागरिकों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है. पंचांगों एवं धर्मसिंधु-निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के निर्देशानुसार इस वर्ष खगोलीय गणनाओं के चलते त्योहारों की तारीखों में विशेष परिवर्तन देखने को मिल रहा है. शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण होने और उस दिन प्रदोष काल से पूर्व ही पूर्णिमा तिथि के समाप्त हो जाने के कारण इस वर्ष होलिका दहन का पर्व एक दिन पूर्व यानी 2 मार्च सोमवार को ही शास्त्रसम्मत रूप से मनाया जाएगा.
ज्योतिषियों का कहना है कि 2 मार्च को प्रदोष काल में शाम 6 बजकर 36 मिनट से रात्रि 9 बजे तक होलिका दहन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. 3 मार्च को होने वाला यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चलेगा और भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा ग्रहणग्रस्त अवस्था में ही उदय होगा. इस ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से ही प्रारंभ हो जाएगा जो ग्रहण की समाप्ति तक प्रभावी रहेगा. इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित होंगे.










