सागर। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एडवोकेट डॉ. अंकलेश्वर दुबे ‘अन्नी’ को बड़ी राहत देते हुए मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद की ओर से जारी री-काउंटिंग के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अध्यक्ष पद के लिए दोबारा मतगणना कराने की कवायद पर फिलहाल विराम लग गया है।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अध्यक्ष पद को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। राज्य अधिवक्ता परिषद की तदर्थ समिति ने 2 सितंबर को री-काउंटिंग कराने का निर्णय लिया था। इस फैसले को डॉ. दुबे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका मुख्य तर्क था कि चुनाव में परिणाम घोषित किए जाने के बाद उसे रोककर दोबारा मतगणना कराने का अधिकार तदर्थ समिति के पास नहीं है।
‘घोषित परिणाम के बाद अधिकार क्षेत्र’ पर उठाया सवाल
डॉ. दुबे की याचिका में राज्य अधिवक्ता परिषद की तदर्थ समिति के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई थी। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया और परिणाम घोषित होने के बाद बिना वैधानिक आधार के री-काउंटिंग का आदेश नहीं दिया जा सकता।
मामले में महाधिवक्ता एडवोकेट प्रशांत सिंह और प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी एडवोकेट संजय द्विवेदी को भी पक्षकार बनाया गया था। विवाद के बीच राज्य अधिवक्ता परिषद ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एचपी सिंह की मौजूदगी में मतों की दोबारा गिनती कराने की प्रक्रिया तय की थी।
पहले परिषद ने लगाई थी अपने आदेश पर रोक
री-काउंटिंग को लेकर विवाद बढ़ने के बाद राज्य अधिवक्ता परिषद ने 2 सितंबर को अपने ही री-काउंटिंग आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इससे मामला और पेचीदा हो गया था और अधिवक्ता संघ की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिक गई थीं।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के आदेश का सबसे सीधा असर यह है कि राज्य अधिवक्ता परिषद के मौजूदा री-काउंटिंग आदेश के आधार पर दोबारा मतगणना की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। हालांकि चुनाव से जुड़े अन्य कानूनी या प्रशासनिक पहलुओं पर आगे कोई कदम उठता है या नहीं, यह संबंधित पक्षों के अगले निर्णय और अदालत के आदेश की विस्तृत प्रति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अध्यक्ष पद की दोबारा मतगणना को लेकर चल रही कवायद को हाईकोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा है और डॉ. अंकलेश्वर दुबे ‘अन्नी’ को इस कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण राहत मिली है।


