बंद कमरे में जाति सूचक गाली पर एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

नई दिल्ली. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत किसी आरोपी पर कार्रवाई के लिए केवल जातिसूचक अपशब्द लगाए जाने का आरोप पर्याप्त नहीं है. कथित अपशब्द ऐसे स्थान पर कहे गए हों जहां आम लोगों की मौजूदगी या उनकी जानकारी संभव हो, यह भी कानून की महत्वपूर्ण शर्त है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में इसी आधार पर स्कूल मैनेजर के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत चल रही कार्यवाही रद्द कर दी. हालांकि मारपीट और अन्य आरोपों से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया गया है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें स्कूल मैनेजर की याचिका खारिज कर विशेष न्यायालय द्वारा जारी समन को बरकरार रखा गया था. मामला रामकृष्ण चौहान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से संबंधित है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के खिलाफ कथित जातिसूचक अपमान को इस अधिनियम के तहत अपराध बनाने के लिए यह देखना आवश्यक है कि घटना सार्वजनिक दृश्यता वाले स्थान पर हुई थी या नहीं.

और पढ़ें

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!