सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश : माता-पिता अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं, इन्हें सम्मान देना जरूरी

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 अगस्त) को कहा कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए. हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था. कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है. सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितनी गरिमा, सम्मान और सुरक्षा देता है.

लखनऊ के मकान से जुड़ा मामला

यह मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील से जुड़ा था. गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था. यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी. मामला तब सामने आया, जब गुप्ता की 81 साल की मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा.  एसडीएम ने 15 नवंबर 2022 को बेटे की बेदखली का आदेश दिया. जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया.

हाईकोर्ट ने बेदखली का आदेश रद्द किया था

बेटे और बहू ने एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं देता. इसके बाद दोनों आदेश रद्द कर दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में दखल देकर गलती की. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है. कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 7 के तहत ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और धारा 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां देती है. वहीं, धारा 27 सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है. इसलिए ट्रिब्यूनल को कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी है.

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