नई दिल्ली. भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को एक नया नेतृत्व मिलने जा रहा है. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी महेश दीक्षित एक जुलाई से देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के निदेशक का पदभार संभालेंगे. चिकित्सा क्षेत्र से भारतीय पुलिस सेवा में आने वाले महेश दीक्षित को देश का पहला चिकित्सक माना जा रहा है, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे.
महेश दीक्षित वर्ष 1993 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त की थी. इतनी उत्कृष्ट रैंक के बावजूद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा के बजाय भारतीय पुलिस सेवा को चुना. उनकी यह पसंद शुरू से ही देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र में काम करने की इच्छा को दर्शाती रही.
महेश दीक्षित और उनकी पत्नी दोनों ने पुणे से चिकित्सा विषय में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है. डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और पुलिस सेवा में आने के बाद नक्सलवाद, आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में लंबे समय तक कार्य किया.
सेवा के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश तथा बाद में तेलंगाना कैडर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. जिला पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया. इसके बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो में शामिल होकर उन्होंने हैदराबाद में बढ़ते आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी ढंग से काम किया. उनके कार्यकाल में राज्य की आतंकवाद निरोधक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.
महेश दीक्षित ने अपने 33 वर्षों के सेवाकाल में अधिकांश समय फील्ड इंटेलिजेंस में बिताया. उन्होंने कोहिमा और पटना में सहायक खुफिया ब्यूरो का नेतृत्व किया तथा रूस की राजधानी मॉस्को में भी विदेशी नियुक्ति पर कार्य किया. इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों पर लगभग एक दशक तक विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां निभाईं.
वर्तमान में वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में विशेष निदेशक के रूप में आतंकवाद निरोधक प्रकोष्ठ का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्हें जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से निपटने, अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के दौरान सुरक्षा समन्वय तथा लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े सुरक्षा मामलों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अनुभव प्राप्त है.
एक जुलाई को वह निवर्तमान निदेशक तपन डेका के सेवानिवृत्त होने के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो की कमान संभालेंगे. सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि आतंकवाद निरोधक अभियानों, खुफिया संचालन और फील्ड अनुभव का उनका लंबा अनुभव देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.










