हैदराबाद. तेलंगाना में नाबालिग लड़की से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. केंद्रीय मंत्री के बेटे Bandi Sai Bhageerath को POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में शनिवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया गया. इससे कुछ घंटे पहले ही तेलंगाना हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद भागीरथ अपने वकीलों के साथ पुलिस के सामने पेश हुए और जांच में शामिल हो गए.
साइबराबाद पुलिस कमिश्नर Ramesh Reddy के अनुसार भागीरथ को नरसिंगी क्षेत्र में हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ और मेडिकल जांच के बाद आरोपी को मेडचल की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा.
यह मामला एक 17 वर्षीय लड़की की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सामने आया है. शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और Protection of Children from Sexual Offences Act यानी POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस का कहना है कि पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेज, जन्म प्रमाण पत्र और कक्षा 10वीं की मार्कशीट अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपे गए हैं, जिनके अनुसार लड़की की उम्र 17 वर्ष तीन महीने बताई गई है.
मामले में केंद्रीय मंत्री ने शनिवार शाम बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने कानून और न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए अपने बेटे को जांच के लिए पुलिस के हवाले किया है. मंत्री ने कहा कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं और चाहे उनका बेटा हो या कोई सामान्य नागरिक, सभी को कानून का पालन करना चाहिए.
उन्होंने बयान में कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. मैंने अपने बेटे साई भागीरथ को वकीलों के माध्यम से पुलिस जांच के लिए सौंप दिया है.” मंत्री ने यह भी कहा कि उनके बेटे का दावा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है.
सूत्रों के मुताबिक शिकायत दर्ज होने के बाद शुरुआत में परिवार सीधे पुलिस के सामने पेश होने पर विचार कर रहा था, लेकिन बाद में कानूनी सलाह ली गई. वकीलों ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उम्मीद जताई थी कि मामले में आसानी से जमानत मिल सकती है. हालांकि मंत्री ने कहा कि उन्होंने ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और बेटे को जांच में शामिल होने के लिए भेज दिया.
इससे पहले हाईकोर्ट की अवकाश पीठ की न्यायाधीश Justice T Madhavi Devi ने शुक्रवार देर रात तक चली सुनवाई के बाद आरोपी को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि आदेश 21 मई को सुनाया जाएगा.









