अब निजी हाथों में जाएगा रेल परियोजनाओं का प्लानिंग और सुपरविजन, पूरे देश में अनिवार्य

नई दिल्ली. अब देश भर में रेल परियोजनाओं की प्लानिंग (प्रबंधन) और उनकी निगरानी (सुपरविजन) का जिम्मा निजी हाथों में सौंपा जाएगा. रेलवे बोर्ड ने प्रोजेक्ट जनरल मैनेजमेंट सर्विसेज (पीजीएमएस) के लिए माडल दस्तावेज जारी कर दिए हैं. इसके तहत अब रेल विकास के बड़े कार्यों में निजी क्षेत्र के एक्सपर्ट्स की सीधी भागीदारी होगी. इसे पूरे देश में अनिवार्य कर दिया गया है.

बड़े प्रोजेक्ट के प्रबंधन व निगरानी की जिम्मेदारी होगी

इस आदेश के मुताबिक रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की जगह अब नई रेल लाइनें बिछाने, पुल बनाने और स्टेशनों के कायाकल्प जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी प्रोफेशनल मैनेजमेंट एजेंसियों के पास होगी. ये प्रोजेक्ट का खाका तैयार करेंगी, मौके पर जाकर यह भी देखेंगी कि काम की गुणवत्ता कैसी है और वह समय पर पूरा हो रहा है या नहीं.

सभी जोन को पत्र जारी

रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक सिविल इंजीनियरिंग अजीत कुमार झा ने सात मई को इसके लिए सभी जोन को पत्र जारी कर दिया है. एनसीआर में प्रयागराज-पीडीडीयू तीसरी लाइन, प्रयागराज जंक्शन का पुनर्विकास समेत सभी जोन में अमृत भारत स्टेशन पुनर्विकास जैसे प्रोजेक्ट्स अपनी मूल समय-सीमा से काफी पीछे चल रहे हैं.

सुपरविजन कमजोर पड़ रहा

वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कारिडोर, बुलेट ट्रेन, उधमपुर-श्रीनगर-बारमूला रेल लिंक समेत 245 से अधिक रेल परियोजनाओं में देरी के कारण लागत में हजारों करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है. रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग पर मेंटेनेंस और नए निर्माण दोनों का बोझ होने से सुपरविजन कमजोर पड़ रहा है. अब बदलाव से परियोजनाएं तय समय पर पूरी होंगी, निजी एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी.

प्रोजेक्ट में विलंब पर एजेंसी पर पेनाल्टी भी

प्रोजेक्ट में देरी पर एजेंसी पर पेनाल्टी लगेगी, जिससे नई रेल लाइनें, रेलवे स्टेशन और पुल समय पर तैयार होंगे. एजेंसियों का चयन जोनल स्तर पर ‘इन्फ्राकान’ पोर्टल के जरिए मुख्य प्रशासनिक अधिकारी करेंगे. ‘काम करने वाला’ और ‘जांच करने वाला’ अलग होने से बंदरबांट की गुंजाइश खत्म होगी. निजी एजेंसियां अपने साथ एआइ आधारित मानिटरिंग और आधुनिक साफ्टवेयर लाएंगी, जिससे पटरियों और पुलों की मजबूती अंतरराष्ट्रीय मानकों की होगी. सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि बोर्ड के निर्देशों के अनुक्रम में व्यवस्था लागू होगी.

एससीआर में सफल हुआ है पायलट प्रोजेक्ट

पायलट प्रोजेक्ट के दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) में इस व्यवस्था का सफल प्रयोग हो चुका है. इससे विजयवाड़ा-गुडूर तीसरी लाइन परियोजना में अर्थवर्क और पुलों के निर्माण की गुणवत्ता में सुधार और काम की गति बढ़ी, जबकि काजीपेट-बल्हारशाह तीसरी लाइन में जमीन की माप और डिजाइनिंग में होने वाली गलतियां न्यूनतम रहीं थी. यहां इन्फ्राकान पोर्टल के जरिए एजेंसी चुनी गई थी. रिकार्ड, प्रगति रिपोर्ट में सटीकता से आडिट और तकनीकी जांच में आसानी हुई. इसी आधार पर अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है.

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