अब मशीनों से तैयार होगा महाकाल का प्रसाद, 15 दिन में खराब होने पर 15 लाख का जुर्माना

उज्जैन. विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब आधुनिक तकनीक के साथ नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं को बेहतर गुणवत्ता और स्वच्छता युक्त प्रसाद उपलब्ध कराने के लिए अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है, जबकि 20 करोड़ रुपये की लागत से त्रिवेणी संग्रहालय के पास भोजनशाला अन्न क्षेत्र में एक आधुनिक लड्डू प्रसाद यूनिट का निर्माण भी किया जा चुका है। यह कदम वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जब लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे और प्रसाद की मांग कई गुना बढ़ जाएगी।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में महाकाल मंदिर में प्रतिदिन लगभग 50 क्विंटल लड्डू प्रसाद की खपत होती है, जो विशेष पर्वों और त्योहारों पर बढ़कर 100 क्विंटल तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद की आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता बनाए रखना एक चुनौती बन चुका है। इसी को देखते हुए आधुनिक मशीनों के जरिए बड़े स्तर पर उत्पादन की योजना बनाई गई है, ताकि प्रसाद की उपलब्धता, स्वच्छता और स्वाद तीनों को संतुलित रखा जा सके।

अब तक लड्डू प्रसाद का निर्माण मंदिर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित चिन्तामणि गणेश मंदिर परिसर में किया जाता था, लेकिन नई यूनिट बनने के बाद यह पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत हो जाएगी। 50 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैली इस यूनिट में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल शामिल हैं, जहां मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार किए जाएंगे। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ मानव श्रम पर निर्भरता भी कम होगी और गुणवत्ता नियंत्रण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

मंदिर उपप्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, इस टेंडर प्रक्रिया में वही कंपनियां भाग ले सकेंगी जिनके पास कम से कम तीन वर्षों का खाद्य सामग्री निर्माण का अनुभव हो। इसके अलावा कंपनियों का भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण और ISO 22000 से प्रमाणित होना अनिवार्य रखा गया है। साथ ही संबंधित कंपनी का सालाना टर्नओवर कम से कम 40 करोड़ रुपये होना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि काम अनुभवी और सक्षम हाथों में ही जाए।
लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर मंदिर समिति ने बेहद कड़े नियम तय किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि तैयार लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन होनी चाहिए। यदि इस अवधि से पहले प्रसाद खराब होता पाया गया तो संबंधित कंपनी पर 25 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा यदि निर्माण में घटिया या कच्चे माल का उपयोग किया गया तो 5 लाख रुपये का दंड तय किया गया है। वहीं, प्रसाद के पैकेट में वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इन कड़े प्रावधानों का उद्देश्य केवल एक ही है कि श्रद्धालुओं को हर हाल में शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण प्रसाद मिले।

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