सागर ब्यूरो
सागर। बीते कुछ महीनों से शहर में दहशत का सबब बनी कटरबाजी और ठगी, मारपीट, अवैध शराब जुआ सट्टा की घटनाओं पर फिलहाल लगाम लगती नजर आ रही है। सड़कों पर भी सरेराह होने वाली वारदातों में आई कमी को पुलिस की बढ़ती सक्रियता और हाल ही में मैदानी अमले में किए गए बड़े फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों की मानें तो पुलिस ने न केवल अपना नेटवर्क मजबूत किया है, बल्कि बरसों से शहर या एक ही थाने में जमे खास चेहरों को हटाकर अपराधियों के सूचना तंत्र को भी ध्वस्त कर दिया हो जैसे !
तबादला सूचियों से टूटी गफलत
हाल ही में जिला पुलिस प्रशासन द्वारा जारी की गई ताबड़तोड़ स्थानीय तबादला सूचियों ने महकमे में हलचल मचा दी है। शहर के थानों में लंबे समय से पदस्थ कई जाने-पहचाने चेहरों को बदल दिया गया है। इस कदम से न केवल पुलिसिंग में ताजगी आई है, बल्कि विभाग के भीतर और बाहर व्याप्त यह गफलत भी दूर हुई है कि मैदानी व्यवस्था कुछ चुनिंदा कर्मियों के भरोसे ही चलती है। नए चेहरों की तैनाती से थानों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और कसावट दिखने लगी है।
आसूचना (Intelligence) का रोटेशन क्यों था जरूरी?
थाना स्तर पर आसूचना इकाई यानी गोपनीय सूचनाएं जुटाने वाले कर्मियों की भूमिका सबसे अहम होती है। ये वे सिपाही या अधिकारी होते हैं जो अपराध होने से पहले उसकी भनक पुलिस तक पहुँचाते हैं। लेकिन सागर में लंबे समय से एक ही ढर्रे पर चल रहे सिस्टम में कुछ खामियां नजर आ रही थीं चेहरों की पहचान एक ही क्षेत्र में सालों तक रहने के कारण ये कर्मी बदमाशों के लिए आम चेहरा बन चुके थे।
सेंधमारी का खतरा- पुराने संबंधों के चलते अक्सर पुलिस की छापेमारी या गुप्त योजनाओं की जानकारी लीक होने का डर बना रहता था।
नेटवर्क का रोटेशन- रोटेशन न होने से सूचना तंत्र में नयापन खत्म हो गया था।
अब तबादलों के बाद बदमाशों का पुराना सूचना तंत्र छिन्न-भिन्न हो गया है। अपराधियों के लिए नए पुलिस कर्मियों की कार्यशैली को समझना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगा है।
जनता में बढ़ता भरोसा, अपराधियों में खौफ
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि वर्तमान में हालात पहले से काफी बेहतर हैं। पुलिस की गश्त और सक्रियता बढ़ने से आम जन मानस में सुरक्षा का भाव जागा है। वहीं, दूसरी ओर अपराधियों के बीच नए नेटवर्क की कमी साफ देखी जा रही है। पुराने ‘मददगारों’ के हटने से बदमाश अब पुलिस की रडार पर हैं।
मैदानी सिस्टम में बदलाव बेहद जरूरी था। जब चेहरे बदलते हैं, तो काम करने का तरीका और सूचनाएं जुटाने का तंत्र भी नया होता है। इससे अपराधियों को मिलने वाली ‘इनसाइड इन्फॉर्मेशन’ बंद हो गई है- करीब 22 स्थानीय नागरिको ने बताया का कहना है कि पुलिस के अधीक्षक विकाश सहवाल द्वारा किया गया यह सिस्टम रिबूट फिलहाल प्रभावी साबित हो रहा है। यदि इसी तरह आसूचना तंत्र को अपडेट रखा गया और रोटेशन व्यवस्था जारी रही, तो आने वाले समय में शहर को अपराध मुक्त बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। फिलहाल, कटरबाजी पर लगाम लगने से शहरवासियों ने राहत की सांस ली है। वहीं विभागीय सूत्र बताते हैं इस प्रक्रिया में आये और लाइन में बैठे कुछ कर्मी केवल बॉस के जाने का इंतजार रह रहे। हालांकि कुछ लोकल प्रभारी इस पूरी प्रक्रिया से खफा भी नजर आ रहे हैं क्योंकि उनके चुनिन्दा नगीने जा चुके हैं जो एक प्रकार से कमाऊपूत माने जाते थे, वैसे अभी भी स्ट्राइक से बचने अनेक पैतरे चले जा रहे हैं कुछ के द्वारा पर बॉस की नजर से लगता हैं कोई अछूता नहीं रहने वाला ?









