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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में डायबिटीज वाले छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत, अब परीक्षा केंद्र के अंदर ले जा सकेंगे फल और चॉकलेट

दिल्ली ब्यूरो

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक विशेष सर्कुलर जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे छात्रों को अब परीक्षा हॉल के भीतर अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए खाने-पीने की जरूरी चीजें और मेडिकल उपकरण साथ रखने की पूरी अनुमति होगी। बोर्ड का यह फैसला उन छात्रों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें लंबी परीक्षा के दौरान अचानक शुगर लेवल गिरने (हाइपोग्लाइसीमिया) की समस्या का सामना करना पड़ता है। अब छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, क्योंकि बोर्ड का मानना है कि किसी भी छात्र की बीमारी उसकी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।

सर्कुलर के अनुसार, डायबिटीज पीड़ित छात्र अपने साथ चॉकलेट, कैंडी, फल (जैसे केला, सेब, संतरा) और सैंडविच जैसी चीजें ले जा सकते हैं। इसके अलावा, उन्हें ग्लूकोमीटर, इंसुलिन पंप और ग्लूकोज मॉनिटरिंग जैसे आवश्यक उपकरण भी पास रखने की छूट दी गई है। हालांकि, बोर्ड ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक अनिवार्य शर्त रखी है कि ये सभी खाने-पीने की वस्तुएं और उपकरण एक पारदर्शी  बैग या बॉक्स में होने चाहिए। साथ ही, पीने का पानी भी पारदर्शी बोतल में ही लाना होगा ताकि परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकारी उनकी आसानी से जांच कर सकें और परीक्षा की शुचिता बनी रहे।

इस विशेष सुविधा का लाभ उठाने के लिए छात्रों और स्कूलों को कुछ औपचारिकताओं को पूरा करना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिनका विवरण ‘लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स’ में स्कूल द्वारा टाइप-1 डायबिटीज के रूप में दर्ज किया गया है। इसके लिए छात्रों को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर का पर्चा और बीमारी की गंभीरता से संबंधित मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना होगा। इन दस्तावेजों को समय पर बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी स्कूल प्रमुखों को सौंपी गई है।

सीबीएसई ने सभी परीक्षा केंद्रों को भी कड़े निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे छात्रों के प्रति संवेदनशील रहें और यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा के दौरान प्रतिनियुक्त शिक्षकों को इन नियमों की पूरी जानकारी हो। यदि परीक्षा के दौरान किसी छात्र की तबीयत बिगड़ती है, तो केंद्र को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अलर्ट पर रहने को कहा गया है। बोर्ड के इस मानवीय और दूरगामी कदम की अभिभावकों और शिक्षकों ने सराहना की है, क्योंकि इससे गंभीर बीमारी से जूझ रहे मेधावी छात्रों को समान अवसर और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।

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