अध्यक्षी की रेस में युवा चेहरा संजय द्विवेदी, सचिव रहकर दिखा चुके हैं कार्यशैली; अब बार की कमान पर नजर

राजीव रंजन श्रीवास्तव, सागर 

जिला धिवक्ता संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद की जंग दिलचस्प होती जा रही है। इस बार मैदान में युवा चेहरा संजय द्विवेदी भी मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। पूर्व में सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके संजय द्विवेदी का दावा है कि अधिवक्ताओं के बीच लगातार सक्रिय रहना और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनकी कार्यशैली को लेकर अधिवक्ताओं के एक वर्ग में उत्साह नजर आ रहा है।
जिला अधिवक्ता संघ सागर के वर्ष 2026-28 के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार नामांकन सामने आए हैं। इनमें अंकलेश्वर दुबे, कृष्णकांत राय, रामदास राज और संजय द्विवेदी शामिल हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद पर मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है और हर उम्मीदवार अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में अधिवक्ताओं से संपर्क कर समर्थन जुटाने में लगा है।
सचिव के अनुभव को बना रहे ताकत
संजय द्विवेदी के समर्थकों का कहना है कि संगठन में सचिव की भूमिका निभाने के दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं की रोजमर्रा की समस्याओं को करीब से समझा है। इसी अनुभव को अब अध्यक्ष पद की दावेदारी का आधार बनाया जा रहा है। उनका जोर अधिवक्ताओं के सम्मान, सुविधाओं और संगठन को सक्रिय एवं प्रभावी बनाने पर बताया जा रहा है।
युवा चेहरा, सक्रिय कार्यशैली पर जोर
अधिवक्ता संघ के चुनाव में इस बार युवा नेतृत्व को लेकर भी चर्चा है। संजय द्विवेदी लगातार अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं। उनकी कार्यशैली और सहज उपलब्धता को समर्थक उनकी मजबूत पूंजी बता रहे हैं। चुनावी मैदान में उतरने के बाद उनकी सक्रियता से मुकाबले में एक नया कोण जुड़ गया है।
49 नामांकन, अध्यक्ष पद पर चार दावेदार
चुनाव प्रक्रिया में कुल 49 नामांकन फार्म दाखिल किए गए हैं। अध्यक्ष पद के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, सह-सचिव, कोषाध्यक्ष, सह-कोषाध्यक्ष, पुस्तकालयाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य पदों पर भी उम्मीदवार मैदान में हैं। नामांकन की स्क्रूटिनी 12 अगस्त को हुई, जबकि नाम वापसी के लिए 13 अगस्त को दोपहर 3 से 4 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था।
सियासी गणित से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क पर भरोसा
अध्यक्ष पद की लड़ाई में संजय द्विवेदी की रणनीति फिलहाल सीधे अधिवक्ताओं से संपर्क और व्यक्तिगत संवाद पर केंद्रित नजर आ रही है। समर्थक इसे उनकी सबसे बड़ी ताकत मान रहे हैं। अब देखना यह है कि पूर्व सचिव का अनुभव और युवा चेहरा उन्हें अध्यक्ष पद तक पहुंचाने में कितना कामयाब होता है।

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