सागर से आशीष रजक की रिपोर्ट
सावन के महीने में गरीब परिवारों की रसोई की मिठास फीकी पड़ गई है। सरकार ने अंत्योदय अन्न योजना के तहत मिलने वाली एक किलो शक्कर का आवंटन मार्च 2026 से बंद कर दिया है। इसका सीधा असर बुंदेलखंड के लाखों अंत्योदय कार्डधारक परिवारों पर पड़ा है। पहले इन परिवारों को 20 रुपए प्रति किलो की दर से शक्कर उपलब्ध कराई जाती थी। जिला खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मार्च के बाद से शक्कर का आवंटन नहीं आया है, इसलिए वितरण नहीं हो पा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब अंत्योदय हितग्राहियों की किसी सुविधा पर रोक लगी हो। पिछले 12 वर्षों में सरकार ने गरीब परिवारों को मिलने वाली कई आवश्यक वस्तुओं का वितरण चरणबद्ध तरीके से बंद किया है। इससे गरीब परिवारों का घरेलू बजट लगातार प्रभावित हुआ है।
12 साल में ऐसे कम होती गईं सुविधाएं
– करीब 12 वर्ष पहले अंत्योदय हितग्राहियों को मिलने वाला केरोसिन बंद हुआ।
– इसके बाद कई श्रेणियों के हितग्राहियों को मिलने वाले गेहूं, चावल और नमक की व्यवस्था में बदलाव किया गया।
– फिर चना, अरहर दाल, मूंग दाल और बाजरा जैसी खाद्य सामग्री का वितरण बंद कर दिया गया।
– वर्ष 2023 में शासन ने चना, अरहर दाल और बाजरा का वितरण पूरी तरह रोक दिया।
– मार्च 2026 से अब हर महीने मिलने वाली एक किलो शक्कर का आवंटन भी बंद हो गया।
हर नई कटौती से बढ़ा गरीब परिवारों का खर्च
अंत्योदय योजना का उद्देश्य सबसे गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा देना था, लेकिन समय के साथ मिलने वाली सुविधाएं लगातार कम होती गईं। अब शक्कर बंद होने से त्योहारों और दैनिक जरूरतों के लिए गरीब परिवारों को बाजार से महंगे दाम पर खरीदारी करनी पड़ेगी। सामाजिक संगठनों का कहना है कि लगातार हो रही कटौतियों से योजना का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ रहा है।


