अफसर को ब्लैकमेल कर उगाही करने वाले कथित पत्रकार को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इन्कार

ग्वालियर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जीएसटी पंजीयन आवेदन खारिज होने के बाद एक सहायक आयुक्त (जीएसटी) को कथित रूप से ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की उगाही करने और सोशल मीडिया पर उनकी छवि खराब करने की धमकी देने के आरोपी खुद को पत्रकार बताने वाले व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और केस डायरी में उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया धमकी तथा अवैध आर्थिक लाभ हासिल करने के प्रयास की ओर संकेत करती है. ऐसे में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रत्नेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने प्रदीप कुमार जाटव द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308 के तहत दर्ज कथित उगाही के अपराध से जुड़ा है. अदालत ने कहा कि अभियोजन के रिकॉर्ड और केस डायरी के अवलोकन से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी ने आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में अपना काम करवाने का प्रयास किया और असफल होने पर एक लोक सेवक की प्रतिष्ठा को सोशल मीडिया पर कथित रूप से बदनाम करने की धमकी दी.

अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता शिवपुरी में पदस्थ सहायक आयुक्त (जीएसटी) हैं. शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने जीएसटी पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवेदन के साथ वैध पहचान पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं थे. निर्धारित नियमों का पालन नहीं होने के कारण 18 जुलाई 2025 को आवेदन निरस्त कर दिया गया. इसके बाद आरोपी ने लगातार शिकायतकर्ता पर आवेदन स्वीकृत करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.

शिकायत के अनुसार आरोपी स्वयं को पत्रकार बताकर बार-बार कार्यालय पहुंचता था और नियमों के विपरीत जीएसटी पंजीयन मंजूर करने की मांग करता था. जब अधिकारियों ने ऐसा करने से इनकार किया तो उसने कथित रूप से दावा किया कि आवेदन निरस्त होने से उसे आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई शिकायतकर्ता को करनी चाहिए. अभियोजन के अनुसार आरोपी ने पहले 20 लाख रुपये की मांग की और चेतावनी दी कि यदि राशि नहीं दी गई तो वह शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठी और अपमानजनक खबरें प्रकाशित करेगा.

मामले में आगे आरोप लगाया गया कि 11 दिसंबर 2025 को आरोपी के फेसबुक अकाउंट पर शिकायतकर्ता के विरुद्ध कथित रूप से एक समाचार पोस्ट किया गया. इसके दो दिन बाद 13 दिसंबर को शिकायतकर्ता के निवास से संबंधित एक अन्य पोस्ट भी प्रकाशित की गई, जिसमें आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के पहुंचने जैसी भ्रामक बातें लिखी गईं. अभियोजन का कहना है कि आरोपी ने इस प्रकार की कई पोस्ट प्रकाशित कर शिकायतकर्ता की छवि धूमिल

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