हाईकोर्ट ने सागर कलेक्टर का आदेश रद्द किया, सिंचित जमीन के मुआवजे पर किसान को राहत, 60 दिन के भीतर वैधानिक निर्णय लेने के निर्देश

जबलपुर. एमपी के सागर में सूरजपुरा जलाशय योजना के तहत अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़े मामले में किसान रामनारायण को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है. शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने कलेक्टर सागर का 19 फरवरी 2017 का आदेश रद्द कर दिया. साथ ही कलेक्टर को किसान के आवेदन पर नए सिरे से 60 दिनों के भीतर वैधानिक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.

सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर और कविता अहिरवार के तर्कों तथा कानूनी प्रावधानों को देखते हुए जस्टिस मनेंद्र एस. भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 64 के तहत कलेक्टर को मामले के गुण-दोष पर खुद निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. उनका दायित्व मामले को उचित प्राधिकारी या संदर्भ न्यायालय को भेजना है. सागर जिले की केसली तहसील के ग्राम पोलोह निवासी किसान रामनारायण की कृषि भूमि सूरजपुरा जलाशय योजना के तहत जल संसाधन विभाग ने अर्जित की थी. इसमें खसरा नंबर 89/2 की 0.10 हेक्टेयर और खसरा नंबर 174/3 की 0.61 हेक्टेयर जमीन शामिल थी.

वर्ष 2012-2013 के खसरा रिकॉर्ड, पटवारी मानचित्र और स्थापित बोरवेल व मोटर पंप होने के बावजूद, 7 नवंबर 2014 के संशोधित अधिनिर्णय में सिंचित भूमि को असिंचित मान लिया गया. इसके कारण किसान का मुआवजा कम निर्धारित हुआ. उचित प्रतिकर अधिनियम, 2013 की धारा 64 के तहत सक्षम प्राधिकारी को संदर्भ भेजने के लिए आवेदन किया गया था. हालांकि, कलेक्टर सागर ने 19 फरवरी 2017 को खुद ही आवेदन के गुण-दोष पर विचार करते हुए उसे खारिज कर दिया था. इसके बाद किसान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने कलेक्टर का पूर्व आदेश निरस्त करते हुए निर्देश दिए कि किसान के आवेदन पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 60 दिनों के भीतर नए सिरे से वैधानिक निर्णय लिया जाए. इस फैसले से क्षेत्र के अन्य प्रभावित किसानों को भी समय पर उचित मुआवजा मिलने की उम्मीद जगी है.

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