सिवनी हवाला कांड में हाईकोर्ट से बड़ी राहत, डीएसपी सहित तीन के खिलाफ एफआईआर रद्द, कोर्ट ने कहा- कॉल डिटेल से अपराध साबित नहीं होता

जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से सिवनी हवाला कांड में फंसे डीएसपी समेत तीन आरोपियों को बड़ी राहत मिली है. अदालत ने ठोस साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के आदेश दिए हैं.

इस मामले में आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी गई है, जिससे उसे जेल में ही रहना होगा. राहत पाने वालों में डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी व जबलपुर के व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी शामिल हैं. इनकी ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त, प्रकाश उपाध्याय और अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पक्ष रखा.

2.96 करोड़ जब्त किए रिकॉर्ड में 1.45 करोड़ दिखाए-

यह मामला 8 अक्टूबर 2025 को सिवनी में सामने आए हवाला कांड से जुड़ा है. उस समय डीएसपी पूजा पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार की कार से करीब 2.96 करोड़ रुपए नकद जब्त किए थे. आरोप था कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए ही दिखाए गए. मामला सामने आने पर लखनवाड़ा थाना में एसडीओपी पूजा पाण्डेय, डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था.

साजिश या समझौते का ठोस सबूत नहीं-

मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की अदालत में हुई. कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के बीच पहले से कोई साजिश या आपसी समझौता था. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप केवल शक और अनुमान पर आधारित हैं. कॉल डिटेल रिकॉर्ड  से अपराध सिद्ध नहीं होता. साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं. ऐसे में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(वी) के आवश्यक तत्व इन आरोपियों पर लागू नहीं होते, इसलिए चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है.

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