उत्तर से दक्षिण तक रेलवे को मिलेगी रफ्तार, बीना -इटारसी-नागपुर तक चौथी रेल लाइन बिछेगी

सागर. मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के रेल नक्शे पर अपनी रणनीतिक अहमियत को और मजबूत करने जा रहा है. उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में शामिल बीना जंक्शन और इटारसी जंक्शन के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है. केंद्र सरकार की पीएम गति शक्ति योजना के तहत शुरू इस प्रोजेक्ट को देश के उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है. तय समयसीमा के अनुसार इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत इस परियोजना के अंतर्गत दो प्रमुख रेलखंडों पर चौथी लाइन बिछाई जा रही है. पहला प्रोजेक्ट बीना-इटारसी-भोपाल रेलखंड पर है, जिसकी लंबाई लगभग 237 किलोमीटर है और इस पर करीब 4,329 करोड़ रुपये की लागत आएगी. दूसरा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट नागपुर से इटारसी के बीच 297 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन का है, जिसकी अनुमानित लागत 5,451 करोड़ रुपये तय की गई है. इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने से मध्य प्रदेश न केवल देश के रेलवे नेटवर्क का केंद्र बनेगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में उभरेगा.

रेल विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में बीना-इटारसी और इटारसी-नागपुर रेलमार्ग देश के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल हैं. इन रूटों पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का भारी दबाव रहता है, जिसके कारण ट्रेनों की गति प्रभावित होती है और समय पर संचालन चुनौती बन जाता है. चौथी रेल लाइन के निर्माण से इस दबाव को कम किया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और समयबद्धता में सुधार आएगा.

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ माल परिवहन क्षेत्र को मिलने वाला है. रेलवे के माध्यम से होने वाली ढुलाई में तेजी आने से औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. खासतौर पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. कोयला, सीमेंट, अनाज और अन्य औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही अधिक सुगम और तेज हो सकेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी.

यात्री सुविधाओं के लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण है. बीना, इटारसी और नागपुर के बीच ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ यात्रा का समय भी कम होगा. वर्तमान में जहां ट्रेनों को क्रॉसिंग और सिग्नल के कारण रुकना पड़ता है, वहीं चौथी लाइन बनने के बाद निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी. इससे लंबी दूरी की ट्रेनों को समय पर चलाने में भी मदद मिलेगी और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा.

इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. लंबे समय से पिछड़े माने जाने वाले इस क्षेत्र में बेहतर रेल कनेक्टिविटी से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. उद्योगों के विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. सागर, रायसेन, भोपाल और नर्मदापुरम जैसे जिलों में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा.

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