सागर। बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद अब सरकार ने पूरे मामले की मॉनिटरिंग अपने हाथ में ले ली है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और स्वास्थ्य विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी सागर पहुंचे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रभावित मरीजों के उपचार और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
घटना के बाद बंडा, घूघर, नौराज, बराज सहित प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। डॉक्टर और नर्स घर-घर जाकर उन लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले 24 से 48 घंटे में शराब का सेवन किया है। संदिग्ध मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
BMC में बढ़ाई गई निगरानी
गंभीर मरीजों को सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सहित उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार की जरूरत पड़ी है और करीब 25 मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मौतों का आंकड़ा बढ़ने से मचा हड़कंप
सागर के बंडा क्षेत्र में शनिवार रात शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। उल्टी, घबराहट और गंभीर हालत में मरीज अस्पताल पहुंचे। रविवार को मौतों का सिलसिला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। अलग-अलग समय की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 11 से 14 तक बताई गई है।
मिथाइल अल्कोहल की आशंका, जांच जारी
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीजों में दिखाई दे रहे लक्षणों के आधार पर मिथाइल अल्कोहल पॉइजनिंग की आशंका जताई है, हालांकि मौत की अंतिम वजह पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। शराब के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
प्रशासन पर भी उठे सवाल
घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया गया है और एक वरिष्ठ अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया है।
अब डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और ACS दीपाली रस्तोगी के सागर पहुंचने के बाद इलाज, मौतों की वास्तविक वजह और प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य निगरानी सरकार की प्राथमिकता में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि संदिग्ध शराब गांवों तक कैसे पहुंची और इसकी रोकथाम में जिम्मेदार विभागों से कहां चूक हुई।










