नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने वाली पूरी सीबीआई टीम शक के दायरे में, स्कूलों को कागजों में बता दिया कॉलेज

भोपाल ब्यूरो

मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई के अधिकारियों की ही गिरफ्तारी के बाद अब नए नए खुलासे हो रहे हैं। भोपाल में एपीएस एकेडमी ऑफ नर्सिंग साइंस को एक माह पहले उपयुक्त कॉलेज की सूची में शामिल किया गया, जबकि मौके पर स्कूल संचालित होता मिला। यही नहीं वहां एक नए नर्सिंग कॉलेज का बोर्ड लगाकर उसे सूटेबल कॉलेजों की लिस्ट में शामिल कराने की तैयारी की जा रही थी।
भोपाल के साकेत नगर में एक महीने पहले एपीएस एकेडमी ऑफ नर्सिंग साइंस को जांच में सूटेबल लिस्ट में शामिल किया गया। इसी बिल्डिंग में एक स्कूल भी संचालित हो रहा है। यह स्कूल 10 साल से भी अधिक समय से संचालित हो रहा है। अब एपीएस नर्सिंग साइंस कॉलेज को सूटेबल लिस्ट में रखने के एक महीने बाद अब उस जगह पर एक नए केपी मेमोरियल कॉलेज को बोर्ड लगा है। अमर उजाला ने कॉलेज संचालक से बात करने के लिए उनकी वेबसाइट पर दिए फोन नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। वहीं, इस मामले में कांग्रेस नेता रवि परमार ने बताया कि एपीएस कॉलेज को गलत तरीके से सूटेबल लिस्ट में शामिल किया गया था। इसकी उन्होंने सीबीआई को शिकायत की थी। अब यहां पर एपीएस का बोर्ड छत पर पड़ा है और एक नए केपी मेमोरियल कॉलेज का बोर्ड लगा दिया गया है।

रिश्वत लेते दबोचे गए अफसर
सीबीआई ने नर्सिंग कॉलेजों की जांच कर रहे अपने ही अधिकारियों व अन्य को रिश्वत लेते दबोचा है। इस मामले में सीबीआई की दिल्ली टीम ने 23 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 13 को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने उनको 29 मई तक रिमांड पर भेजा है। इन आरोपियों को सीबीआई की टीम दिल्ली ले गई है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। पूरे मामले में मध्य प्रदेश सीबीआई के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद अब पूरी टीम ही शक के घेरे में है। इस मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां होने की आशंका है।
पूरी जांच भी संदेहास्पद
बता दें, प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता संबंधी मापदंड और नियमों में गड़बड़ी सामने आने के बाद मप्र हाईकोर्ट ने सीबीआई को 364 कॉलेजों की जांच सौंपी थी। इसमें एजेंसी ने करीब 318 कॉलेजों की जांच रिपोर्ट पेश भी कर दी है। इसमें से करीब 169 कॉलेजों को सूटेबल लिस्ट में रखा है। अब सीबीआई अधिकारियों, कॉलेज संचालक, प्रिंसिपल और दलालों की गिरफ्तारी के बाद पूरी जांच ही संदेहास्पद हो गई है।

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